उस समय के कुछ दुर्लभ क्षण जब गुरुदेव ने मानव रूप को सुशोभित किया था। व्यक्तिगत घटनाओं को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

– (श्री राजपॉल सेखरी द्वारा लिखित – गुरुदेव के प्रमुख शिष्यों में से एक)

लेखक की कलम से

सन् 2010 की बात है कि दो महीने अमेरिका रहने के बाद जब मैं वापिस आया तो उस समय महाशिवरात्रि का समय नज़दीक था। सभी लोग इसी इंतजार में थे कि कब महाशिव अपनी समाधि से उठें और गुरुजी से सभी को आशीर्वाद मिले, जिसका हम लोग भी इंतज़ार कर रहे थे। मैं परम सुः…

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1. गुरूजी से मेरी प्रथम भेट, मेरे जीवन का पहला दिन ।

सत्तर के दशक की बात है, एक दिन सुबह-सुबह श्रीमति शीला चौधरी, जो मेरे ससुराल के पड़ोस में रहती थी, आयी और कहने लगी। ”मेरे गुरुजी के हाथ में ॐ है’ और वो आपकी पत्नी श्रीमति गुलशन को ठीक कर सकते हैं। तभी मेरी पत्नी गुलशन को लेकर श्रीमति शीला के साथ, मैं और मेरी…

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2. गुरुजी के पास छुट्टियों में जाना।

गुड़गाँव गुरुजी के पास पहले मैंने रविवार और छुट्टी के दिन ही जाना शुरु किया। जब मैं उनके पास जाता तो देखता कि वहाँ बहुत से लोग तरह-तरह की बीमारियों से पीड़ित और अपनी घरेलू परेशानियाँ लेकर आते और गुरुजी के चरण छूकर उन्हें, दूर करने की प्रार्थना करते। जैसे ही गुरुजी उन्हें छूते उनके…

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3. पहली बार मैंने जब, किसी को ठीक किया।

रविवार का दिन था, मैं हमेशा की तरह सुबह पंजाबी बाग कल्ब से टेनिस खेलकर घर लौट रहा था। अचानक मेरे दिमाग में ख्याल आया कि क्यों न मैं घर जाने से पहले गुरुजी के दर्शन कर आऊँ ? और मैं गुड़गाँव चला गया। जब मैं गुड़गाँव पहुंचा तो उस समय गुरुजी चारपाई पर बैठे…

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4. शिवपुरी स्थान पर जब गुरुजी ने, मेरी बेटी के दाँत पुनः चार साल के अन्तराल के बाद, दुबारा उगाये।

सत्तर के दशक की बात है, जब चार साल की मेरी छोटी बेटी ने खेलते हुए अपने आपको घायल कर लिया। वह गिर गई थी और उसके ऊपर कोई भारी चीज़ गिर गई। जिससे उसके सामने के चार दाँत टूट गये थे। मेरी पत्नी जब अपने डेनटिस्ट के पास गईं तो उसने बताया कि जब…

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5. गुरूजी का सादा जीवन

गुरुजी, आम लोगों के बीच अक्सर बड़ी सादी ड्रेस जैसे लुंगी और कमीज और/या पैन्ट-कमीज में ही रहते थे। अस्सी के दशक में, गुरुजी के अनुयाईओं की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। संसारिक तौर पर पिता होने के नाते गुरुजी अब अपने बच्चों के लिए भी समय बहुत मुश्किल से निकाल पाते थे। इसके बावजूद…

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6. मेरा गुरुजी के पास, सुन्दर नगर (हिमाचल) जाना।

”सुन्दर नगर” हिमाचल प्रदेश का एक पहाड़ी इलाका है। वहाँ गुरुजी अपने विभाग की ओर से भूमि निरीक्षण हेतु ऑफिश्यिल टूअर पर गये थे। यह सोच कर कि गुरुजी के आसपास सुन्दर नगर में अधिक लोग नहीं होंगे जैसा कि आमतौर पर गुड़गांव में होते हैं, मैंने अपनी धर्मपत्नी गुलशन और बच्चों को, गुरजी के…

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7. जब गुरुजी ने मुझे महा-मृत्युन्जय मंत्र का जाप करने से मना कर दिया

एक बार मैं, अपने दारियागंज स्थित शोरुम में बैठा था कि गुरुजी आये और उन्होंने मुझसे पूछा – ”बेटा, तुम्हारा महा मृत्युन्जय मंत्र का जाप… कैसा चल रहा है?” मैंने जवाब दिया–”गुरुजी, बहुत मजा आ रहा है। मैं जब भी इस मंत्र का जाप शुरु करता हूँ, अभी दो-तीन बार ही पढ़ता हूँ कि एक…

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8. जब गुरुजी ने मुझे, गुड़गाँव स्थान पर आध्यात्मिक सेवा करने का आदेश दिया

मैंने गुड़गाँव गुरूजी के चरणों में लगातार जाना शुरु कर दिया था। गुरुजी के पास रोजाना हर तरह के लोग आते थे। उनमें हर उम्र के स्त्री, पुरूष व बच्चे होते, जो अपनी-अपनी समस्यायें चाहे वह घरेलू, शारीरिक, मानसिक हों या फिर सामाजिक, लाकर गुरुजी के सामने रखते थे। मैं उन लोगों को बड़ी उत्सुकता…

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9. जब हिमाचल प्रदेश की पहाडियों से, वापिस आते हुए गुरुजी ने अपनी, ऑफिस की जीप को, न्यूट्रल गियर में रखा।

जब गुरुजी अपने ऑफिश्यिल टूअर पर जाते, तो वहाँ अपने शिष्यों में से किसी शिष्य, जैसे सीताराम जी, आर. पी. शर्मा जी, एफ. सी. शर्मा जी, सनेत के सुरेश जी तथा मैं या फिर कुछ और शिष्यों में से किसी को भी ले जाते ताकि वहाँ जब गुरुजी अपने ऑफिस के काम पर जाएं तो…

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10. जब मैंने ट्रेन में बिना आरक्षित टिकट के, गुरूजी के साथ, मुम्बई यात्रा की।

हमेशा की तरह, मैं अपने दरियागंज स्थित शोरुम में बैठा था कि फोन की घन्टी बजी, मैंने फोन उठाया, उधर से गुरुजी की आवाज आई—- ”मैं ईस्ट पटेल नगर अन्जू के घर हूँ।” अन्जू, गुरुजी की बहुत चहेती बच्ची थी और हम सब शिष्य भी उसे बहुत प्यार करते थे। गुरुजी ने हम सब को…

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11. जब केदारनाथ जी की यात्रा से वापिस आते हुए फीएट कार के बेक फेल हो गये।

गुरुजी हमें समय-समय पर अक्सर तीर्थ यात्राओं पर लेकर जाते रहते थे। कई बार हमें, अपने परिवार को भी साथ ले जाने की आज्ञा मिल जाती थी। इस बार वे हमें बद्रीनाथ, केदारनाथ और ऋषिकेश आदि की, यात्रा पर ले गये। जब हम सब करीब 25 लोग, केदारनाथजी की लगभग नौ या दस किलोमीटर की…

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12. सीताराम जी की मुम्बई हवाई यात्रा।

सीताराम जी, गुरुजी के शुरु के पहले शिष्यों में से एक थे। जो अमेरिकन एक्सप्रेस बैंक में एक उच्च पद पर कार्यरत थे। उनका अपना एक अलग ऑफिस था और गुरुजी अक्सर शाम को ऑफिस का समय समाप्त होने के बाद उनसे मिलने जाया करते थे। एक दिन शाम को गुरुजी उनके ऑफिस पहुंचे, तो…

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13. जब मेरा अपनी फैक्ट्री में एक्सीडेन्ट हुआ ।

एक दिन सुबह-सुबह की बात है, मैं अपनी फैक्ट्री में एक रोलिंग मिल के फ्लाईव्हील (Fly Wheel) को शॉफ्ट पर लगा रहा था। इस पहिये (Wheel) का वज़न टनों में था। वह तीन टांगों वाले स्टैन्ड पर टंगे चैन ब्लाक पर करीब 12 फुट की ऊंचाई पर लटकाया गया था। इस पहिये को जमीन पर…

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14. रेनुकाजी— गुरुजी ने अपने शिष्यों को सेवा के लिए बुलाया

एक बार गुरुजी, अपने सहयोगियों के साथ, भूमि सर्वेक्षण के लिए रेनुका जी गये। वहाँ उन्होंने एक पुराना सा घर जिसमें दो कमरे थे, किराये पर लिया। कमरों के बाहर बहुत खुला मैदान था। जिसमें बहुत से फल के पेड़ लगे हुए थे, लेकिन वे पेड़ स्वस्थ नहीं थे और न ही उन पेड़ों पर…

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15. रेनुकाजी— लोगों का सैलाब।

अगले रविवार जब सुबह हम पहुंचे, तो देखकर चकित रह गये कि करीब 15 लोग लाईन लगा कर हमारा इन्तजार कर रहे थे। नाश्ते के बाद, उसी तरह गुरुजी ने हमें आदेश दिया–“जाओ सेवा करो” और दूर बैठकर हमें देखते रहे। लोग लाईन में आ रहे थे और उनमें बहुत से नये लोग भी थे।…

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16. एक लड़की काँच की चूड़ियों की उल्टी कर रही थी।

एक बार सुबह-सुबह, एक लगभग सत्तरह वर्षीया लड़की, जिसका नाम कमलेश है और वह मुज्जफर नगर, उत्तर प्रदेश की रहने वाली थी, अपने माता-पिता के साथ गुडगाँव, गुरुजी के पास आई। उसकी एक टाँग मुड़ी हुई थी वह सीधी नहीं होती थी। इस कारण वह चलने में असमर्थ थी। गुड़गाँव स्थान पर गुरुजी के प्रिय…

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17. जब गुरुजी को हवाई-अड्डे पर लेने गया

मैं अपने दरियागंज स्थित शोरुम में बैठा था कि अचानक मुझे श्री आर. पी. शर्मा जी (जो गुरुजी के प्रिय शिष्यों में से एक हैं) का फोन आया कि आपके लिए गुरुजी की तरफ से एक संदेश आया है कि गुरुजी मुम्बई से वापिस आ रहे हैं, उनकी फ्लाईट रात को आठ बजे पहुंचेगी, आप…

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18. जब गुरुजी पहली बार पंजाबी बाग पधारे ।

एक दिन शाम की बात है, कि अचानक मैं अचम्भित रह गया, जब मैंने देखा कि गुरुजी पंजाबी बाग हमारे घर आये हैं। हमारे लिए तो ये ब्रह्माण्ड की सबसे बड़ी खुः शी का समय था कि गुरूजी ने हमें, अपने ही घर में दर्शन दिये और वह भी बिना किसी पूर्व सूचना के। मेरी…

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19. गुडगाँव स्थान पर बड़े वीरवार की सेवा

सत्तर के दशक की बात है, जब गुरूजी ने मुझे, अपना शिष्य बनाया था। उस समय गुड़गाँव की शिवपुरी कालोनी में, किराये के मकान में, अक्सर 7:30 – 8:00 बजे के बीच बड़े वीरवार की सेवा शुरु होती थी। श्री आर. पी. शर्मा, एस. के. जैन साहब, सूरज प्रकाश शर्मा और कई अन्य शिष्य भी,…

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20. जब गुरुजी ने एक व्यक्ति के भाई की पेट दर्द ठीक की।

एक बार की बात है कि गुरुजी, माताजी के साथ अपने कमरे में बैठे थे। कोई व्यक्ति आया और उनसे अपने भाई, जो तेज पेट-दर्द से कराह रहा था, उसको ठीक करने और आशीर्वाद देने की प्रार्थना करने लगा। गुरुजी उस समय, एक अलग ही मूड में बैठे थे। कहने लगे— ”अपनी घड़ी में समय…

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21. गुरूजी द्वारा, पंजाबी बाग स्थान की स्थापना।

एक बार गुरुजी बड़े गम्भीर मूड में मुझसे बोले— ”पंजाबी बाग में एक स्थान बनवाओ और मैं स्वम् आकर उसकी स्थापना करूंगा। मैंने तुम्हें, बहुत सी आध्यात्मिक शक्तियाँ दी हैं, जिनसे तुम लोगों को ठीक कर सकते हो। अतः तुम यहाँ पर सेवा करो। दिल्ली के लोगों के लिए यह सुविधाजनक होगा।’ मैंने पूछा– ”गुरुजी,…

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22. गुरुजी नागपुर से मुम्बई गये।

गुरूजी को अपने ऑफिस द्वारा दिये, भूमि-सर्वेक्षण के कार्य हेतु, दूर-दूर ऑफिशियल दौरों पर जाना पड़ता था। इस बार दौरा नागपुर का था। वे हमेशा, अपने ऑफिस का कार्य दिन में जल्द ही पूरा करके उसके बाद, वहाँ के लोगों की समस्याओं का समाधान करते थे। उन्हें बहुत खुः शी मिलती थी, जब उनके पास…

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23. गुरूजी ने यश सेठी को ठीक किया

कुछ दिन बाद गुरुजी, दुबारा मुम्बई गये और यश सेठी के इलाज को आगे बढ़ाया। इस बार वे अपने साथ आर. पी. शर्मा जी व कुछ दूसरे शिष्यों को भी ले गये थे। करीब एक महीने के बाद, गुरुजी फिर गये और एक रात गुरुजी ने यश से पूछा, “….यश, क्या तुम अपने पैरों पर…

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24. गुरूजी के साथ लंदन यात्रा।

गुरुजी मुझे अपने साथ लंदन ले गये। मैं अपने गुरुजी के साथ और वह भी विदेश की धरती पर था। सम्पूर्ण वातावरण जैसे आनन्दमय था। गुरुजी के, एक मिनट के दर्शन के लिए हजारों लोग, घण्टों लम्बा इन्तजार करते थे। कुछ लोग कहते, ”गुरुजी आते तो हैं, परन्तु जल्दी-जल्दी चले जाते हैं तो कुछ लोग…

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25. रात के एक बजे, शिष्यों के लिए, नीम्बू शिकन्जवी।

एक रात गुड़गाँव स्थान पर, गुरुजी अपने शिष्यों के साथ बैठे हुए थे कि अचानक उन्होंने बिटू को कहा कि वह जाकर माँ से कहे कि सब शिष्यों के लिए शिकन्जवी बनायें। गर्मी बहुत थी और सभी को प्यास भी लगी थी। माता जी ने आकर बताया कि घर में नीम्बू नहीं हैं। उस वक्त…

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26. गुरुजी ने, पाँच-छ: महीने पुरानी बीमारी, एक मिनट में ठीक की।

महागुरुजी के एक शिष्य की चार बेटियाँ हैं और सभी का गुरुजी में, दृढ़ विश्वास है। उस शिष्य की बड़ी बेटी, एक बार बहुत अधिक बीमार पड़ गई। आम तौर से बीमार पड़ने पर गुरुजी उन्हें लौंग, इलायची व जल देते और उसकी परेशानी दूर हो जाती थी। लेकिन इस बार कुछ ऐसा हुआ कि…

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27. जब मेरी बेटी मुक्ता की शादी थी।

”गुरुजी, मेरी बेटी मुक्ता की शादी में केवल 10-11 दिन ही शेष बचे हैं मैं क्या करुंगा…?” ”शादी के लिए सामान खरीदना है सारे इन्तजाम करने है और मेरी पेमेन्टस नहीं आ रही हैं।’ गुरुजी बोले—मैं अपने आप कर लूंगा। तू चिन्ता न कर। मैं बोला— ”गुरुजी, शादी मतलब गहने चाहिए, कपड़े लेने हैं और…

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28. एक छोटी लड़की, जिसको दौरे पड़ते थे। गुरुजी ने ठीक किया

गुड़गाँव स्थान पर, ‘बड़े वीरवार’ की सेवा चल रही थी। वहाँ एक छोटी सी लड़की, जिसका नाम पम्मी था और उसकी उम्र लगभग छः या सात साल की होगी, अपने अंकल के साथ आई। वह देखने में तो बिलकुल स्वस्थ नज़र आ रही थी, लेकिन अचानक वह बेहोश होकर नीचे गिर जाती थी। उन्होंने उसे…

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29. जब एक जवान लड़की ने परेशानी में आकर तेजाब पी लिया, गुरूजी ने उसे बचाया।

एक लड़की, जिसकी उम्र लगभग सोलह साल की थी, ने किसी निराशा में आकर तेजाब पी लिया। उसके परिवार वाले दौड़ते हुए गुरूजी के पास आये और उनसे प्रार्थना की। गुरुजी ने अपने प्रिय शिष्य श्री आर. पी. शर्मा जी को आदेश दे कर भेज दिया कि वे उसे जूठा जल पिला दें। शर्मा जी…

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30. मेरा अमेरिका का वीजा।

गुरुजी के आदेश का पालन करते हुए, मैं वीज़ा लेने के लिए अमेरिकन एम्बैसी गया और सम्बधित कागजात जमा कराये। लेकिन उन्होंने मुझे वीजा देने से मना कर दिया और कागज़ात वापिस लौटा दिये। शाम को मैं गुरुजी के पास गया और उन्हें प्रणाम किया, तो उन्होंने मुझसे पूछा, ”तुम वीजा के लिए गये थे,…क्या…

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31. जब गुरूजी परीक्षा देने गये।

ट्रेनिंग के दौरान, परीक्षक (Examiner) ने एक दिन गुरुजी को चेतावनी दे डाली कि ”वह उन्हें फाईनल परीक्षा में फेल कर देगा।” उस समय गुरुजी ने भूमि सर्वेक्षण विभाग में सहायक वैज्ञानिक (Assistant Scientist) के पद का, कार्यभार संभाला था। तब वे खाली समय में लोगों की सेवा करते और उनसे बातचीत करते थे। उनके…

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32. गुरु पूर्णिमा…..।। जब गुरुजी ने बरसात कराई।

पूरे साल में, केवल एक ही दिन आता है जिस दिन सभी शिष्य गुरुजी की पूजा करते हैं। गुरूपूर्णिमा के दिन से कुछ दिन पहले सम्पूर्ण भारत से ही क्या विदेशों से भी लोग उनकी इस पूजा में सम्मिलित होने के लिए आते हैं। गुरुजी अर्द्धरात्रि 2 : 15 बजे से आशीर्वाद देना शुरु करते…

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33. जब गुरूजी ने सीताराम जी से कहा, देखो तुम्हारा भाई आ रहा है।

एक बार मैंने अपनी धर्मपत्नी के भाई दीप के साथ गुरुजी के दर्शन करने के लिए उनके ऑफिस कर्ज़न रोड़ पहुंचा। वहाँ पहुँच कर देखा कि गुरुजी अपने शिष्यों के साथ सड़क पर ही खड़े है। हम सब गुरुजी की तरफ बढ़ने लगे। उन्होंने भी हमें देख लिया और सीताराम जी से बोले– ”देख वे…

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34. जब कत्ल की सजा (सजा-ए-मौत) पाये एक मुजरिम को, गुरुजी ने बचाया।

बड़े वीरवार का दिन था। बेसमैन्ट में और शिष्यों के साथ मैं भी बैठा लोगों की सेवा कर रहा था। यानि उन्हें लौंग, इलायची और जल दे रहा था। गुरुजी अपने कमरे में थे और सभी श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देने के उपरान्त, उन्हें शिष्यों के पास जाने का निर्देश दे रहे थे। तभी मेरे पास,…

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35. डॉक्टर शंकर नारायण — गुरुजी के शिष्य।

डॉक्टर शंकर नारायण, जो भूमि विज्ञान के ज्ञाता और पुस्तक लेखक के अतिरिक्त, गुरुजी के ऑफिस में गुरुजी के सीनियर भी थे। एक दिन वे मुझे पकड़ कर, एक कोने ले गये और बोले– ‘राजपॉल, मुझे तुमसे एक व्यक्तिगत बात करनी है। कल हमारे ऑफिस में एक कॉन्फ्रेन्स थी। जिसमें सभी ऑफिसर आये थे और…

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36. जब मैं कार चलाते-चलाते सो गया।

वह भी एक सुबह थी, जब गुड़गांव में यह घटना घटी। गुरुजी को अपने ऑफिस जाना था और उन्होंने मुझे आदेश दिया कि कार तुम चलाओ और वे मेरी साथ वाली सीट पर बैठ गये। मैंने कार स्टार्ट की और रेलवे रोड़ को पार कर बाँये तरफ मुड़ा। मारुति फैक्टरी की तरफ से होते हुए,…

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37. गुरुजी की बहन देशी बुआ की शादी हुई।

गुरु पूर्णिमा का समय था। गुरु पूजा हो चुकी थी। लेकिन लंगर सेवा चल रही थी। हजारों की संख्या में लोग गुरुजी से गुरूपूर्णिमा के अन्तिम आशीर्वाद का इन्तजार कर रहे थे। स्थान पर बहुत भीड़ थी। दोपहर के समय गुरुजी ने मुझे बुलाया और कहा— तुम पंजाबी बाग चले जाओ और आराम करो लेकिन…

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38. जब चार भाई, अपनी माँ की लम्बी आयु का, आशीर्वाद लेने आये।

गुरुजी अपने ऑफिस सम्बन्धित कार्य से, हिमाचल प्रदेश के टूअर पर थे। हमेशा की तरह गुरुजी, अपना कार्य समाप्त करने के उपरान्त, उनके पास आने वाले लोगों की हर प्रकार की समस्याओं का समाधान कर रहे थे। एक दिन की बात है, मैं गुरुजी के पवित्र-चरणों में बैठा हुआ था कि तभी चार भाई, गुरुजी…

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39. डॉक्टर सूरी अपनी मिटिंग से पहले, गुरुजी के, दर्शन करना चाहता था।

गुरुजी पर अपार श्रद्धा और पूर्ण विश्वास, रखने वाला भक्त डॉक्टर सूरी एक बार गुरुजी के दर्शन करने और उनसे आशीर्वाद लेने गुड़गाँव स्थान पर आया। वह बरामदे में खड़ा उनका इन्तजार कर रहा था कि गुरुजी आये और उसने उन्हें प्रणाम किया। गुरुजी बोले— ”जब तक मैं वापिस ना आ जाऊँ, …तुम स्थान पर…

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40. जब मैं अपनी पुरानी कार बेच रहा था।

मैं जनकपुरी में, सीताराम जी के घर बैठा था और किसी को अपनी पुरानी कार बेच रहा था। तभी वहाँ पर गुरुजी का फोन आया। वे कहने लगे— ”तू यहाँ क्या कर रहा है?” मैंने कहा—”गुरुजी मैं अपनी पुरानी कार बेच रहा हूँ।” गुरुजी ने आगे पूछा— ”कितने में?” मैंने उन्हें बताया कि जो खरीद…

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41. गुरुजी ने एक बूढ़े सरदार जी के घुटने, ठीक किये।

गुरुजी साल में कम से कम दो तीन बार मुम्बई जाते थे। लोग उनका वीरजी (कुलबीर सेठी, जो कि यश सेठी के बडे भाई थे, वही यश सेठी, जिसे गुरुजी ने चमत्कारी ढंग से ठीक किया था) के घर गुरुजी का इन्तजार करते थे। गुरुजी ने उनके घर स्थान बनाया था। वीरजी और उनके भाई…

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42. गुरूजी ने मुझे तुरन्त कुल्लू बुलाया

मैं अपनी फैक्ट्री में बैठा था कि अचानक सूरी की माताजी का फोन आया और उन्होंने मुझसे कहा कि आपको गुरुजी ने अभी कुल्लू बुलाया है। मैं अपने ड्राईवर, शिव कुमार को साथ लेकर एअरपोर्ट पहुंचा। जब मैं वायुदूत सेवा के टिकट काउन्टर पर पहुंचा और मैंने टिकट खरीदा वह उस फ्लाईट का आखिरी टिकट…

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43. जब मैंने वीरवार के दिन गलती से शेव कर ली।

गुरुजी द्वारा कुछ विशेष निधारित नियम हैं, जो हम सब के लिए आध्यामिक उपलब्धि और शान्तिपूर्ण अच्छी जिन्दगी जीने के लिए मानना जरुरी है। जिसमें से एक नियम वीरवार के दिन शेव न करना भी है। वीरवार का दिन था। जब मै सुबह नहाने के लिए गया, तो गलती से मैंने शेव कर ली। लेकिन…

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44. जब डॉक्टर कुमुदिनी मेरे पति अपने आसक्त प्रेम के बारे में जानना चाहती थी।

जैसा कि गुरुजी ने मुझे आदेश दिया था, मैं प्रत्येक शनिवार के दिन सुबह-सुबह अपने घर पंजाबी बाग में लोगों की सेवा के लिए बैठ जाता था। बहुत से लोग वहाँ अपनी समस्यायें लेकर आते और मैं गुरुजी द्वारा दी गई आध्यात्मिक शक्तियों का प्रयोग करता और लोग अविश्वस्नीय तरीके से ठीक हो जाते और…

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45. जब एक महिला, पिछले छः महीनों से सो नही सकी।

कुछ ऐसे लोग, जो मेरे अपने सोशल सर्कल में भी आते हैं, उन्हें भी पता लगा कि गुरुजी ने मुझे कुछ आध्यात्मिक शक्तियाँ दी हैं और मैं अपने घर पर ही लोगों की सेवा करता हूँ । एक बार मेरी धर्मपत्नी की आन्टी ने उसे बताया कि उसकी बहू, (बेटे की पत्नी) पिछले छ: -आठ…

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46. जब गुरुजी के शिष्य की बेटी, अपनी परीक्षा से पहले, विषय के बारे में ही भूल गई।

एक बार गुरुजी के पहले शिष्यों में से एक, श्री एफ. सी. शर्मा जी, जो गुरुजी के विभाग में ही काम करते थे, आये और गुरुजी को अपनी परेशानी का कारण बताया। उनकी बेटी सुनीता की परीक्षा है और उसका फोन आया है कि उसने परीक्षा के विषय के बारे में जो कुछ भी याद…

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47. जब एक सरदारजी, चार महीनों से, कुछ भी नहीं खा पा रहे थे।

एक परिवार लगभग चालिस वर्षीय एक अद्भुत मरीज़ को गुरुजी के पास लेकर आया, जिसने पिछले चार-पाँच महीने से कुछ भी नहीं खाया था। वह बिलकुल एक कंकाल की तरह लग रहा था। वे गुरुजी के पास आया और बताया कि जब वह खाना चबाता है और उसे निगलने की कोशिश करता है तो काँपने…

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48. जब मुझे अपने बड़े भाई की मौत का स्वप्न आया

अपने शयनकक्ष में मैं सो रहा था। मैंने स्वप्न में अपने छोटे भाई को देखा, जो मुझसे कह रहा था—- ”उठो हमारे बड़े भाई, सत्यपाल की मृत्यु हो गई है।” मैंने उसे नज़रादाज़ कर दिया और फिर से सो गया। कुछ देर बाद वह फिर आया और पुनः याद दिलाते हुए बोला— ”तुम अभी तक…

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49. जब पंजाबी बाग में, गुरुजी ने लगातार सिरदर्द के लिए, एक महिला के माथे पर स्ट्रोक्स लगाये।

एक दिन की बात है, देर शाम को गुरुजी, पंजाबी बाग आये और हमेशा की तरह लोग उनके दर्शन के लिए आना शुरु हो गये। तभी मेरी पत्नी गुलशन की एक सहेली, गुरुजी के पास आयी और उनसे प्रार्थना करने लगी कि वह अपने लगातार होने वाले सिर दर्द से बहुत परेशान है। गुरूजी ने…

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50. जब गुरुजी ने मुझे, एक ‘मिरगी’ के मरीज को सड़क पर ठीक करने पर डाँट लगाई।

एक दिन सुबह-सुबह का समय था और हमेशा की तरह मैं, अपन शोरुम में बैठा था कि मेरा एक चपरासी दौड़ता हुआ आया और मुझसे कहने लगा कि बाहर एक आदमी को ‘मिरगी का दौरा’ पड़ गया है। मैं दौड़कर बाहर आया और देखा कि वास्तव में ही उसे ‘मिरगी का दौरा’ पड़ा था। उसकी…

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51. जब गुरूजी ने मुझे अस्पताल के ICU विभाग में, किसी मरीज़ को जल देने भेजा।

एक बार की बात है, गुरूजी अपने गोल मार्किट वाले क्वॉटर के बाहर खड़े थे कि अचानक कुछ लोग आये और गुरुजी से, अपने किसी व्यक्ति के बारे में बताने लगे जो किसी अनजान बीमारी से ग्रसित था। गुरजी ने मुझे आदेश दिया—‘ ‘राज्जे, तुम इन लोगों के साथ अस्पताल जाओ और उस व्यक्ति को…

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