67. जब गुरुजी अपना शरीर छोड़ गये और दुबारा उसमें वापिस लौटे।

गुरूजी का जन्म स्थान, पंजाब के होशियारपुर जिले के हरियाना गाँव में है। गुरुजी अपने कुछ शिष्य, जिनमें सीताराम जी, सनेत के सुरेश जी, आर. पी. शर्मा जी तथा मैं,…

66. जब दूबे जी की बिल्डिंग गुरूजी के आशीर्वाद से खाली हो गई।

उत्तर प्रदेश के रहने वाले दूबे जी को, राजस्थान में स्थित अपनी जायदाद की कुछ समस्या थी। जो उसने वहाँ एक बैंक को किराये पर दे रखी थी। दूबे जी…

65. जब गुरुजी एक ही समय में चार जगह उपस्थित थे।

मैं यहाँ आपकी जानकारी के लिये कुछ लिख रहा हूँ, जो एक अलग तरह के ज्ञान पर आधारित है। अतः इस पर गम्भीरता पूर्वक विचार करें। इसे समझने के लिये…

64. जब मैंने और गुरूजी ने एक साथ अमेरिका जाने का प्रोग्राम बनाया।

गुरुजी के आशीर्वाद से जब मैंने, उनके साथ व्यापारिक विदेश-यात्रा (Business Trip) के लिये अमेरिका जाने का प्रोग्राम बनाया, तो गुरूजी ने अपनी स्वीकृति दे दी। इस बात से मैं…

63. जब गुरुजी ने रात को अपने स्कूटर का इंजन फुटपाथ पर खोला।

गुरुजी के पास, एक स्कूटर था। जिसे वे अक्सर अपने ऑफिस जाने के लिए प्रयोग करते थे। एक बार गुरुजी वही स्कूटर चला रहे थे और उनके पीछे उनके शिष्य…

62. जब समुद्र ने, गुरूजी के चरण छूकर उनको प्रणाम किया।

बहुत से बच्चे, जिनमें इन्द्रा, बिन्दु, परवानु की इला गुप्ता, रेनु, बब्बा, छुटकी, पप्पू, इन्दु, रूबी, राहुल तथा और भी बहुत से बच्चों को अपने साथ लेकर गुरुजी मद्रास गये।…

61. जब गायत्री श्रीवास्तव ने गुरुजी के दर्शन करने की जिद्द की।

श्रीवास्तव जी, गुरूजी के शिष्य हैं और ‘लखनऊ’ में सेवा करते हैं। निजी जीवन में उनका प्रकाशन का कारोबार है और वह वहाँ से ‘उत्थान की दिशा’ नामक एक आध्यात्मिक…

60. जब गुरुजी ने पंडित रामकुमार की भाँजी, कृष्णा को ठीक किया।

कृष्णा नामक नवयुवती, पंडित रामकुमार की भांजी को बार-बार दौरे पड़ते थे। दौरों के दौरान वह अक्रामक (Violent Behaviour) हो जाती थी। उसका परिवार उसके इस व्यवहार से बहुत परेशान…

59. जब कैशियर ने, गुरूजी के टूअर बिल के भुगतान करने से, मना कर दिया।

शुरु-शुरु के दिनों में लोग इन्हें, गुरुजी की तरह नहीं जानते थे। वे भारत सरकार की मिनिस्ट्री ऑफ एग्रीकल्चर में एक भू-वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत थे। गुरुजी अपने दफ़्तर…

58. जब गुरूजी अपने शिष्यों के साथ हरिद्वार गये और थोड़ी सी चपातियों से वहाँ उपस्थित सभी लोगों को रात्रि का भोजन कराया।

एक बार गुरुजी, अपने शिष्यों के साथ हरिद्वार गये और उनके साथ उनके अन्य शिष्यों के अलावा, जालन्धर वाले मामाजी और नदौन के संतोष भी थे। एक रात वहाँ पर…