उस समय के कुछ दुर्लभ क्षण जब गुरुदेव ने मानव रूप को सुशोभित किया था। व्यक्तिगत घटनाओं को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

– (श्री राजपॉल सेखरी द्वारा लिखित – गुरुदेव के प्रमुख शिष्यों में से एक)

लेखक की कलम से

अविश्वस्नीय झलकियों के भाग-1 व भाग-2 में कुछ झलकियाँ प्रकाशित एवं वितरित करने के बाद कुछ और ऐसी झलकियाँ मुझे स्मरण हो आईं, जिन्हें मेरे सुपर मॉस्टर गुरूजी ने इस पुस्तक में लिखने के लिए निर्देशित किया, जिसे अविश्वस्नीय झलकियाँ भाग-3 के नाम से जाना जायेगा। मैं आत्म विभोर हूँ और आपके लिए भी यही…

Read more

103. जब गुरुजी ने मुझे बिना शर्त आत्म समर्पण का वरदान दिया।

गुरुजी ने मुझसे पूछा, “…..राज्जे, दो और दो कितने होते हैं?” मैंने उत्तर दिया, “गुरुजी, चार।” गुरूजी बोले, “……नहीं बेटा, पाँच होते हैं।” मैंने सहमति से हाँ कहा और बोला, “जी गुरूजी, पाँच होते हैं। सुनकर गुरुजी बोले “बेटा, दिल से नहीं कहा।” मुझे लगा जैसे मैं पकड़ा गया और शर्माते हुए बोला, “गुरुजी, दो…

Read more

104. जब गुरूजी का एक प्रारम्भिक शिष्य, गर्दन और गले की समस्या से बीमार पड़ गया।

गुरुजी के एक बहुत पिय शिष्य से सम्बन्धित यह उपकथा (Episode) वर्णित है। गुरुजी ने उसके घर में स्थान बनाया है और बड़े वीरवार को छोड़कर, बाकी दिन सेवा करने का आशीर्वाद और आदेश दिया है। (बड़े वीरवार के दिन वह सारा दिन गुड़गाँव स्थान पर होते हैं।) वह गुरुजी के आदेशानुसार, वहाँ सेवा कर…

Read more

105. जब गुड़गाँव स्थान पर गुरुजी के पैर दबाते हुए, मैंने उन्हे काट लिया।

दोपहर का समय था और मैं गुरुजी के दर्शन करने गुड़गाँव गया। गुरुजी अपने कमरे में थे और लाईन में खड़े हुए लोगों को आशीर्वाद दे रहे थे। उन्हें प्रणाम करने के बाद मैं उनके पलंग की दूसरी तरफ चरणों के पास बैठ गया। गुरुजी उस समय बाँयी करवट लेकर आधे लेटे हुए थे तथा…

Read more

106. जब गुरुजी ने कानपुर की गुडुन को ठीक किया।

सन् 1975 की बात हैं जब एक सरकारी अधिकारी (Government Officer) ने अपनी व्यक्तिगत समस्या अपने सहयोगी के सामने रखी। मि. श्रीवास्तव ने मि. दत्ता से, अपने दुख का कारण बताया। वे दोनों ही सरकारी विभाग में, उच्च अधिकारी के पदों पर दिल्ली में कार्यरत थे। मि. श्रीवास्तव ने कहा, “मेरी बहन की एक लड़की…

Read more

107. जब सोमवार उपवास के दिन, छोले-कुल्चे खाने का मन में विचार आया।

एक बार गुरुजी बहुत से बच्चों, जिनमें इन्द्रा, जो उन्हीं के परिवार की सदस्या है तथा अन्य शिष्यों को लेकर कुल्लू जा रहे थे। सभी लोग करीब सात या आठ कारों में सवार थे। गुरुजी स्वयं सबसे आगे वाली कार में थे। उस दिन सोमवार का दिन था और सभी का उपवास था। कारों का…

Read more

108. गुरुजी सर्वव्यापक हैं। एक बच्चा जो नये स्कूल में गया था उसकी आत्मा की पुकार सुनी।

एक चमत्कार हुआ, जब एक बच्चा, जिसने गुरुजी को दिल से पुकारा और अपनी इच्छा व्यक्त की तो गुरुजी ने बिना समय लगाये उसी समय उसकी इच्छा पूर्ण कर दी। यह घटना मेरी बेटी बिन्दु ने मुझे सुनाई। जब वह सेन्ट थोमस स्कूल में पढ़ती थी और कुछ दिन पहले ही उसने उस स्कूल में…

Read more

109. गुरुजी नागपुर में थे टेलीफोन पर बात कर रहे थे जबकि दरवाजे पर बाहर से ताला लगा था।

गुरुजी नागपुर में जब अपने ऑफिश्यिल टूअर पर थे तो उन दिनों दूर संचार के लिए, केवल स्थाई टेलीफोन (Land Line Telephone) ही उपलब्ध था। यह उपकथा वहीं पर घटित एक अनोखे चमत्कार से सम्बन्धित है। नागपुर में गुरुजी ने अपने और अपने स्टाफ के ठहरने के लिए जो स्थान लिया था, उसके एक कमरे…

Read more

110. जब सतनाम सिंह उर्फ मंगा का एक्सीडेन्ट हुआ और डॉक्टर ने कहा बचने की कोई उम्मीद नहीं है।

सतनाम सिंह उर्फ मंगा की दिल्ली में एक वर्कशाप थी। वह अपनी खराद मशीन पर भारी-भारी मशीनों के पुर्जे बनाने का काम किया करता था। एक बार जब वह अपनी मशीन चला रहा था और उसकी मशीन पर बन्धा हुआ एक बड़ा सा पुर्जा, किसी वजह से अचानक खुल गया और उसके माथे पर आ…

Read more

111. जब गुरुजी चामुण्डा दर्शन के लिये मुझे और अन्य शिष्यों को मैसूर लेकर गये।

गुरुजी मुझे तथा कुछ अन्य शिष्यों को, कुछ दिनों के लिये बैंगलौर ले गये। कुछ दिन बाद किसी शिष्य ने गुरुजी से मैसूर के चामुण्डा मंदिर के दर्शन करने की प्रार्थना की और गुरुजी ने भी तुरन्त अपनी स्वीकृति दे दी। एक दिन हम सब कार से मैसूर पहुंचे। वहाँ पहुँचकर हमने एक गाईड बोला…

Read more

112. जब एक महिला दस साल पहले गुरुजी के सामने की गई गलती की माफी माँगने, मेरे पास आई।

गुड़गाँव स्थान पर मैं सेवा कर रहा था। वहाँ पर बहुत से लोग थे। सबसे अन्त में एक महिला अपनी एक विचित्र सी समस्या लेकर, मेरे पास आई और कहने लगी कि वह अपनी टाँगों के जोड़ों के दर्द से पिछले दस साल से परेशान है। हमेशा, जब वह स्थान पर आती है तो उसकी…

Read more

113. जब गुरुजी ने मुझे गाली देकर छेड़ते हुए कहा “YOU IDIOT” अब तू गुरू को भी आशीर्वाद देगा?

पंजाबी बाग में सेवा का दिन था। बहुत से लोग एकत्र हुए थे और वह एक-एक करके आशीर्वाद लेने के लिये मेरे पास आ रहे थे। लोगों को इस तरह आशीर्वाद लेने के लिए हमेशा घन्टों इन्तजार करना पड़ता था। मैं पूर्ण एकाग्रता के साथ, अपनी सेवाकार्य में लीन था। जैसे कि अपनी बारी से…

Read more

114. जब गुरुजी ने ‘महाशिवरात्रि’ और ‘गुरुपूर्णिमा’ पर आने वाले भक्तजनों के लिए लंगर सेवा प्रारम्भ की।

सत्तर के दशक के अन्त में गुरूजी ने गुड़गाँव स्थान पर लंगर सेवा शुरु की। बहुत से लोग, जो दूर दराज़ के गाँव अथवा शहरों में रहते थे, जिन्हें गुरुजी ने ठीक किया या बचाया था, उन लोगों को गुरुजी की अनुपस्थिति खलती थी। किन्तु गुरुजी के दर्शन करने हेतु, उनका हर उत्सव पर गुड़गाँव…

Read more

115. जब माताजी ने एक पतीला दाल बनाई और उसमें एक बड़ा चम्मच नमक डाला।

सत्तर के दशक के अन्त की बात है। जब मैं रविवार के दिन गुरुजी का आशीर्वाद लेने गुडगाँव जाता था और शाम तक उस नये अविश्वस्नीय माहौल में, वहाँ रहता था। गुरुजी स्थान के कमरे में बैठते थे और लोग आते रहते थे। एक…, दो….. दस…. सौ…. और… उससे भी ज्यादा। गुरुजी हमेशा आनन्दित मुद्रा…

Read more

116. हम सब शिष्यों के बीच में से जब गुरुजी को एक महात्मा ने एक नज़र में ही पहचान लिया।

गुरुजी के पास लोग, अक्सर अपनी समस्याओं तथा दुख एवम् पीड़ा निवृति के लिये आते थे। किन्तु कभी-कभी कोई सन्त महात्मा लोग भी गुरूजी से आशीर्वाद लेने आ जाते थे। मुझे एक अद्भुत अनुभव हुआ। वैसे तो ऐसा अक्सर होता रहता था किन्तु एक बार ऐसा हुआ कि कुछ महात्मा आये और अपने शिष्यों के…

Read more

117. जब मैं गुरुजी के कमरे में उनके चरणों की सेवा कर रहा था, तो महसूस हुआ कि उनकी बाँयी टाँग अति नरम थी।

मेरी जिन्दगी का यह एक बहुत बड़ा चमत्कार था जो 101% मेरी समझ से परे था। वास्तव में हमारे धर्मग्रन्थ, जैसे ‘शिवपुराण’ का अध्ययन करें तो उसमें इस तरह का वृतान्त आता है जिसमें भगवान शिव देवऋषि नारद को शिव व शक्ति के एक रुप होने के बारे में बताते हैं। सिर्फ नारद जी के…

Read more

118. जब गुरुजी के साथ लॉस-ऐंजलिस एअरपोर्ट पहुँचे और कृष्ण कुमार हमें लेने आया।

सैन-फ्रांसिसको एअरपोर्ट पर गुरुजी तथा माताजी के साथ संतलाल जी, बतरा बक्शी, मैं तथा कुछ अन्य गुरुशिष्य थे। हमें लॉस-ऐंजलिस के लिये फ्लाईट लेनी थी। संयोगवश मैं वहाँ रखे हुए एक साईनेज (Signage) पर होटलों के नाम पढ़ने लगा। गुरुजी ने देख लिया और मुझे बुला कर हल्की डॉट के साथ कहा, “बेटा, गुरु होटलों…

Read more

119. जब गुरुजी ने कहा कि अरुण कुमार ने ग्राहक को जो फनीचर दिया है उसमें दीमक नहीं है।

सन् 1990 की बात है। गुरुजी ने एक अद्भुत रचना रची। अरुण कुमार की कीर्तिनगर में फर्नीचर की फैक्ट्री है। वह पंजाबी बाग में बैठा, स्थान की बैठक और सोने के कमरों (Drawing Room & Bed Rooms) को सुव्यवस्थित करने का कार्य करवा रहा था। वह मुझसे पलंग (Bed) के डिज़ाईन के बारे में बात…

Read more

120. जब गुरूजी ने कहा कि उसकी दोनों किडनियाँ ठीक हैं

सन् 2005 की बात है। मैं पंजाबी बाग स्थान पर बैठा, सेवा कर रहा था। एक दम्पति अपने दो व्यस्क बेटों को लेकर मेरे पास आये। उन्होंने मुझसे उन्हें आशीर्वाद देने की प्रार्थना की। मैंने उनसे वैसे ही पूछा कि क्या तुम पहली बार आये हो…? उस महिला ने मुस्कुराते हुए जबाब दिया, “नहीं गुरुजी,…

Read more

121. जब मैं अपनी फैक्ट्री, हरियाणा से दिल्ली, स्थानांत्रित कराना चाहता था।

गुरूजी अपने कुछ शिष्यों के साथ, ईस्ट पटेल नगर की सड़क के किनारे खड़े होकर उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान दे रहे थे। वह रात का समय था। मेरे ‘सुपर मॉस्टर’ गुरूजी का यही तरीका था। वे अक्सर इसी तरह अपने शिष्यों पर अपने आशीर्वादों की वर्षा करते थे। बिलकुल सड़क के किनारे खड़े होने के कारण…

Read more

122. देवेन्द्र जैन ने लंदन एयरपोर्ट पर गुरुजी से कैमी साबुन अपने सामान में साथ ले जाने की प्रार्थना की।

गुरुजी ने अपना अमेरिका और यूरोप का टुअर, श्री आर. पी. शर्मा, डी. एस. जैन, बक्शी बतरा, देवेन्द्र जैन तथा कई अन्य शिष्यों के साथ पूर्ण किया। एयरपोर्ट की बात है, वहाँ चेक-इन पर सभी यात्री अपना-अपना सामान का वजन कराने के लिए दे रहे थे। चैकिंग ऑफिसर सामान का वज़न करने के बाद, कानून…

Read more

123. संतलाल जी की गुरुजी के साथ, मनीकरण से ऊपर की अविस्मरणीय यात्रा।

एक बार गुरुजी संतलाल जी को लेकर मनीकरण गये। मनीकरण हिमाचल प्रदेश का एक पवित्र तीर्थ स्थल है। यहाँ पार्वती नदी, अपने अत्याधिक ठण्डे पानी के साथ बहती है और वहीं खौलते पानी के बहुत से झरने व तालाब भी हैं। यह एक अद्भुत स्थान है। ऋषि लोग पूर्ण विश्वास के साथ बताते हैं कि…

Read more

124. जब गुरुजी ने मुम्बई में एक पारसी लड़की को ठीक किया।

दुबारा, एक बार फिर मुम्बई में.., शाम को सेवा शुरु हुई। दिन में गुरूजी अपने शिष्यों को साथ लेकर कुछ परिवारों के घर गये थे क्योंकि उनके घरों में उनकी शारीरिक उपस्थिति जरुरी थी। सूर्यास्त के बाद ‘वीरजी’ के घर पर सैंकड़ो भक्त एकत्रित हो गये और गुरुजी ने सेवा प्रारम्भ कर दी। गुरुजी ने…

Read more

125. जब गुरुजी लेटते ही, सैकिण्डज़ में सो गये।

गुरुजी मुम्बई में थे और सेवा जोर-शोर से चल रही थी। ‘वीरजी’ के मुम्बई, खार स्थित घर में लोगों की भीड़ उमड़ी चली आ रही थी और उनका घर एक मंदिर सा प्रतीत हो रहा था। श्रद्धालुगण गलियारे के रास्ते (Passage) में ही क्या, उनके घर के ड्राईंगस्म के अलावा बाहर मुख्य सड़क पर भी…

Read more

126. गुरु जी दुअर पर गये थे और माताजी कमरों में ताले लगाकर बच्चों के साथ छत पर सोने चली गई थी।

हमेशा की तरह गुरुजी अपने ऑफिश्यिल टुअर पर बाहर गये हुए थे। रात हुई और सभी कमरों के ताले लगाकर माताजी बच्चों को लेकर स्थान की छत पर सोने चली गईं। करीब आधी रात के समय तेज हवाएं चलने लगी और माताजी ने सोचा कि शायद बारिश आने वाली है। अतः वे सभी को लेकर…

Read more

127. हरियाणा आटो के मि. गुप्ता, जब अपनी फैक्ट्री को दुबारा शुरु करने के लिए मेरे पास मायापुरी आये।

मायापुरी इण्डस्ट्रीयल एरिया में मेरी फैक्ट्री है। इस इण्डस्ट्रीयल ऐरिया में और भी बहुत सी फैक्ट्रियाँ हैं जो विभिन्न प्रकार के प्रोडक्ट्स का निर्माण करती हैं। मेरी फैक्ट्री के ठीक सामने सड़क के उस पार एक फैक्ट्री है। उसका नाम हरियाणा आटो है, जहाँ प्लास्टिक का सामान बनता है। एक दिन सुबह-सुबह उस फैक्ट्री के…

Read more

128. जब अपने शिष्य के. सी. कपूर को श्रीमति ऑबराय को आशीर्वाद देने इर्विन अस्पताल भेजा।

जून 1984 की बात है। गुरुजी का गाजियाबाद, ऑबराय की फैक्ट्री में जाने का प्रोग्राम था परन्तु अंतिम समय पर अचानक गुरुजी ने वहाँ जाने का प्रोग्राम स्थगित कर दिया। इसी बीच ऑबराय के बेटे अनूप ने सूचना दी कि उसकी माँ, चलती कार से नीचे गिर गई है तथा उसके सिर में गम्भीर चोट…

Read more

129. जब गुरुजी ने अपने बेटे बबे को बेसमेन्ट में 108 बाल्टियाँ जल की पहुँचाने का आदेश दिया।

गुरूजी का बेटा बब्बा, उस समय किशोरावस्था में था और बड़े वीरवार के दिन अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने में मस्त था। वह पूजनीय गुरुजी का बड़ा बेटा है और उसका पूरा नाम प्रवेश चानन है। अचानक उसे एक सन्देश मिला कि गुरूजी उसे बुला रहे हैं। वह थोड़ा घबरा गया और गुरुजी के…

Read more

130. जब श्री आर. पी. शर्मा बुखार पर तो सहमत थे लेकिन घर और ऑफिस में नहीं।

गुरुजी अपने शिष्य आर.पी. शर्मा जी को बहुत प्यार करते थे। एक बार की बात है कि एक बुखार और जोड़ों के दर्द से ग्रसित एक गम्भीर मरीज़ गुरुजी के पास आया और गुरुजी ने उसे आर.पी शर्मा जी के पास भेज दिया। शर्मा जी ने उसे बिलकुल ठीक कर दिया अर्थात वह पूर्ण रुप…

Read more

131. जब गुरूजी, शाम के समय गुड़गाँव स्थान की छत पर खड़े, आकाश की तरफ देख रहे थे।

एक दिन शाम को मैं गुड़गाँव पहुंचा तो पता चला कि गुरुजी छत पर हैं। मैं भी छत पर चला गया और गुरूजी के दर्शन पाकर आनन्दित हो गया। उन्होंने आशीर्वाद देने के बाद मुझे नीचे चटाई पर बैठने को कहा तथा खुद चुपचाप आकाश की ओर देखने लगे। कुछ समय बाद उन्होंने मेरी तरफ…

Read more

132. जब मैं गुरूजी के दर्शन करने के लिए गुड़गाँव गया तो सेवादार पूरन ने मुझे गुरूजी से मिलने से रोक दिया।

अस्सी के दशक के अन्त की बात है एक शाम हमेशा की तरह मैं गुरुजी के दर्शन करने हेतु गुड़गाँव गया। इससे पहले कि मैं गुरुजी के कमरे की तरफ अपने कदम बढ़ाऊँ, गुरुजी का एक प्रिय सेवादार पूरन मेरे पास आया और आकर उसने मुझे प्रणाम किया तथा कहा, “गुरूजी ने कहा है कि…

Read more

133. गुरुजी ने अपने अनूठे अन्दाज़ में संदेश देकर, बब्बू को सड़क पर रोका।

मनुष्यों में यह एक आम स्वाभाविक प्रवृति है कि वे चमत्कार देखकर उससे बहुत जल्दी प्रभावित हो जाते हैं। एक बार बब्बू अपने स्कूटर पर तेजी से फैक्ट्री जा रहा था कि अचानक वह किसी दूसरे स्कूटर वाले से टकरा गया। दोनों स्वयं व उनके स्कूटर, सड़क पर गिर गये। बबू जल्दी से उठा तथा…

Read more

134. जब एक बैंक कर्मचारी को उल्टी में हरी मिर्च निकली।

सत्तर के दशक के उत्तरार्ध से लगातार, पंजाबी बाग स्थान पर गुरुजी के आदेश व आध्यात्मिक नियन्त्रण में सेवा होती चली आ रही है। लोग अपने दुख व समस्यायें लेकर आते और उन्हें दूर करवा कर सन्तुष्ट होकर गुरुजी की प्रशंसा करते हुए, खुः शी-खुः शी वापिस जाते हैं। स्थान के इस पवित्र कार्य की…

Read more

135. जब गुरूजी ने लाजपत नगर की नीलम जो ब्लड कैंसर से पीड़ित थी, को प्रसाद की फुल्लियाँ दी।

लाजपत नगर में रहने वाली नीलम, एक आर्किटेक्ट की पत्नी जिसे ब्लड़ कैंसर था, बड़े वीरवार के दिन गुड़गाँव पहुंची। उसने गुरुजी से इस बीमारी को ठीक करने के लिये आशीर्वाद देने की प्रार्थना की तो गुरूजी ने उसे स्थान पर ‘मीठी फुल्लियों का प्रसाद’ चढ़ाने का आदेश दिया। गुरुजी ने उसे लौंग, इलायची तथा…

Read more

136. जब गुरुजी ने मुझे मोहन सिंह पैलेस में लस्सी पिलाई।

एक दिन सुबह अपने शोरुम जाने से पहले उनके दर्शन करने के लिए मैंने गाड़ी गुरूजी के ऑफिस की तरफ मोड़ दी। गुरुजी को वहाँ पाकर मेरा मन गद्गद् हो गया। उस दिन महीने की पहली तारीख थी और ये दिन सभी सरकारी ऑफिसरों के वेतन का दिन होता है। गुरुजी ने मुझे दर्शन दिये…

Read more

137. ‘गुरुपूर्णिमा’ जब शिष्य अपने गुरु की पूजा करते हैं।

इस दिन का अपना एक अलग ही महत्व है उन लोगों के लिए, जिन्हें अपने इस जीवन में अपने गुरु का आशीर्वाद मिल गया हो। इस दिन एक शिष्य अपने गुरु की पूजा करता है फूलों से, उनके चरण धोता है केसर के जल से, एक नारियल और नौ वस्त्र अपर्ण करता है, उन्हें मिठाईयाँ…

Read more

138. जब एक आत्मा ने, गुरुजी की महिमा का गुणगान किया।

डी. एस. जैन एक भक्ति परायण गुरूशिष्य और जगदीश सैंगर एक भक्त है। एक बार डी. एस. जैन को सैंगर का धमकी भरा, फोन आया कि कौन महारथी है मैं सबको उठाकर फैंक दूंगा। यह कहकर उसने टेलीफोन रख दिया। जैन साहब जगदीश सैंगर के घर गये। वहाँ उन्होंने देखा कि उसकी जीभ उसके मुंह…

Read more

139. जब गुरूजी ने अपने शिष्य आर. सी. मल्होत्रा जी के अन्दर छिपी धन की चाहत को समाप्त कर दिया।

स्वयं की भावनाओं पर नियन्त्रण और अपनी इच्छाओं को सदैव सम्पूर्णतयाः वश में रखने वाले गुरुजी, अपने शिष्यों को बहुत प्यार करते थे। वे उन्हें भी अपने जैसा बनाना चाहते थे। यह एक अनूठा कार्य था लेकिन आसान नहीं था। वे रोजाना उनके व्यवहार, आदतों और उनकी कमियों को देखते तथा उन्हें दूर करने की…

Read more

140. जब मेरे ड्राईवर ने कहा कि कार में जिन्दा साँप है तो गुरुजी ने बिना समय लगाये सच्चाई का पता लगा लिया।

शायद सन् 1980 की बात है। मैं नहा रहा था कि अचानक मेरी पत्नी ने दरवाजा खटखटाया। असल में वह डर गई थी और यह जानकर सन्तुष्ट होना चाहती थी कि मैं ठीक तो हूँ ना। मेरे जवाब देने पर वह निरिंचत होकर बोली, “पता चला है कि जो कार आप कल्ब लेकर गये थे,…

Read more

141. जब सन्नी कत्याल की पुरानी सिरदर्द गुरुजी के एक अद्भुत क्रिया से बिलकुल ठीक हो गई।

गुड़गाँव का सन्नी कत्याल, जो बिटू कत्याल का छोटा भाई है, बहुत लम्बे समय से सिरदर्द से परेशान था। उसे जल्दी-जल्दी सिरदर्द होती थी और गुरुजी उसको ठीक कर देते थे। लेकिन उसे सिरदर्द की समस्या बार-बार होती थी। यह उसके लिए एक गम्भीर समस्या बन गयी थी जोकि लम्बे समय से चली आ रही…

Read more

142. गुरुजी की तस्वीर स्कूल प्रिंसीपल के ऑफिस की दीवार पर लगी थी लेकिन वह गुरुजी के बारे में कुछ नहीं जानता था।

एक दम्पति अपने बच्चे के दाखिले के लिये एक स्कूल में गये। जब वह प्रिंसीपल के ऑफिस में पहुंचे तो दीवार पर लगी गुरूजी की तस्वीर को देख कर प्रसन्न हो गए। वह दम्पति गुरुजी के भक्त थे। महिला के पति ने प्रिंसीपल से पूछा कि आपको गुड़गाँव गुरुजी के स्थान पर जाते हुए कितना…

Read more

143. जब कृष्ण कुमार साहनी और उसकी पत्नी स्वर्ण से, गुरुजी गोल मार्किट में मिले ।

यह पता लगने के बाद कि गुरुजी, गोल मार्किट में स्थित बक्शी बतरा जी के घर पर हैं, कृष्ण कुमार अपनी पत्नी को साथ लेकर गुरुजी के दर्शन करने के लिये वहाँ गया। कृष्ण कुमार ने बहुत से लोगों से गुरुजी की महानता के बारे में सुन रखा था। जिससे गुरुजी के प्रति उसके दिल…

Read more

144. जब सेना के जनरल जगदीश अपने बच्चों के लिये कानूनी संरक्षण का अधिकार माँगा।

एक बार पंजाबी बाग में सेवा करते समय एक खूबसूरत नौजवान मेरे पास आया और मुझसे अकेले में बात करने की प्रार्थना की। उसे अपने साथ लेकर मैं ड्राईंग रुम में चला गया और बात करने के लिये कहा। उसने मुझे अपने आपको सेना का सेनानायक (Captain) बताया और मुझे दो बच्चों की फोटो दिखाते…

Read more

145. जब एक रात में गुरुजी ने ‘वीरजी’ की भांजी के चेहरे का मुहासा दूर कर दिया।

गुरुजी गुड़गाँव में थे और अचानक एक गम्भीर समस्या मुम्बई में गुरुशिष्य ‘वीरजी’ के परिवार में आ गयी। ‘गुरुशिष्य वीरजी’ की भाँजी ने आत्महत्या करने की धमकी दे डाली थी। वीरजी ने गुरुजी से प्रार्थना की कि जल्दी आईए और उसके परिवार की रक्षा कीजिए…. || गुरुजी, तुरन्त वहाँ पहुंचे और लड़की को अपने कमरे…

Read more

146. जब गुरूजी ओ. पी. आहूजा से बोले कि वे इस व्यक्ति का इन्तजार पाँच साल से कर रहे थे।

ओ. पी. आहूजा, आयकर विभाग में एक अधिकारी के पद पर कार्य करता था। वह गुरुजी के पास आया और बोला, “गुरुजी, मेरे विभाग में एक ऑफिसर है जिसका नाम आई. डी. शर्मा है। वह मुझे बहुत परेशान करता है। मैं चाहता हूँ कि वह मेरे नियन्त्रण में आ जाये ताकि ऑफिस का माहौल ठीक…

Read more

147. जब शिष्यों ने लंदन में खरीदारी की और गुरुजी ने पाउण्ड्स में उसका भुगतान किया।

Guruji was in London along with some of His Shishyas & Devotees like R. P. Sharmaji, Sardar Bakshi, Sabharwal and a few more. Some doctor living in Black Pool had invited Guruji with a great eagerness and devotion. So Guruji stayed in his house for a couple of days. The doctor requested Guruji to allow…

Read more

148. जब बड़े वीरवार के दिन मध्यान्तर के दौरान, रवि त्रेहन के लिए गाना गाने के बाद, मैं बोल भी नहीं सका।

अस्सी के दशक की शुरुआत की बात है। गुड़गाँव स्थान पर असंख्य लोग थे और सम्पूर्ण वातावरण में सिर्फ एक ही आवाज सुनाई दे रही थी और वह थी ‘गुरुजी’। कारों के शीशों पर स्टिकर लगे थे– एक ही सत्य— ‘गुरुजी’ सम्पूर्ण वातावरण एक ही शब्द से गूंज रहा था ‘गुरुजी’ । स्थान के क्या…

Read more

149. एक संसारिक रुप में गुरुजी, “मर्यादा पुरुषोत्तम”

अस्सी के दशक के मध्य की बात है जब गुड़गाँव के सैक्टर-7 पर गुरुजी के दर्शन के लिये असंख्य लोगों की भीड़ चरम सीमा तक पहुंच गयी थी। रोजाना सुबह और शाम को स्थान के हॉल में तथा बाहर सड़क पर अनगिनत भक्तजन दर्शन हेतु एकत्रित होते थे। गुरुजी के लिये अपने ऑफिस जाना भी…

Read more

150. मेरे एक मित्र की बहन नाजी, जो लगातार सिरदर्द व नींद न आने की बीमारी से ग्रसित थी।

मेरे बचपन के दोस्त को पता चला कि गुड़गाँव वाले महान गुरूजी ने मुझे अपना शिष्य बनाया है। वह मेरी पत्नी ‘गुलशन’ के भी बहुत करीब था, उसने अपनी परेशानी का कारण बताते हुए कहा कि मेरी छोटी बहन नाजी, जो पिछले छ: महीने से लगातार होने वाले सिरदर्द से बहुत परेशान है और रात…

Read more

151. जब मुम्बई के दिनेश ने 1989 में अपने सीनियर स्टॉफ की शिकायत, गुरूजी से की।

मुम्बई के रहने वाले भक्तजन गुड़गाँव आकर, गुरुजी का आशीर्वाद लेने की ‘महाशिवरात्रि’ और ‘गुरु पूर्णिमा’ का बेसब्री से प्रतीक्षा करते थे। दिनेश भंडारे भी, ‘सुपर लार्ड’ का इन्तजार करने वालों में ऐसा ही एक भक्त है जो कभी इस अवसर को अपने हाथ से निकलने नहीं देना चाहता था। ऐसे ही एक अवसर पर…

Read more

152. जब गुरुजी ने एफ. सी. शर्मा जी को बाहर सड़क पर गुरु दर्शन के लिए लाईन में खड़े भक्तजनों की परिक्रमा करने के लिए कहा।

गुड़गाँव के सैक्टर 7, के स्थान के बाहर सड़क पर गुरुजी के दर्शन के लिए, अनगिनत लोग लाइन में खड़े थे। स्थान के पीछे सड़क और फुटपाथ को अलग रखने के लिए शामियाने लगाये गये थे ताकि उसमें भक्तजन लाईन में अपने ‘सुपर लार्ड’ गुरुजी की एक झलक पाने के लिए इन्तज़ार कर सकें। गुरूजी…

Read more

153. प्रेम और भक्ति की चरम सीमाओं का एक उदहारण

गुरुजी ने कहा, “बेटा, मैंने ये भी तो देखना है ना कि मेरे गुरु के गले में हार मुझसे कम ना पड़ें। …वाह, क्या रिश्ता है गुरूजी का अपने गुरु के साथ, प्रेम और मौहब्बत की इन्तहा– जवाब नहीं। वो शिवरात्रि का दिन था। सुबह की शुरुआत से लेकर रात्रि के 12 बजे तक लोगों…

Read more