102. गुरुजी के पास लोग विभिन्न कारणों से…. और विभिन्न इच्छाएं लेकर आते थे।

ब्रह्मज्ञान के लिये वैसे तो, गुरुजी के द्वार, हर किसी के लिये खुले थे लेकिन लोग इनके पास विभिन्न प्रकार की इच्छाएँ और विभिन्न कारणवश आते थे, जिनमें से—– कुछ लोग, संसारिक ज़रुरतों को पूरा करने की प्रार्थना करते थे। कुछ, उनसे अपनी बीमारियाँ दूर कर, एक स्वस्थ शरीर के लिये प्रार्थना करते। कुछ लोग,…

101. गुरुजी समय के अधीन नहीं, अपितु समय उनके अधीन है।

अस्सी के दशक की बात है। गुरुजी गोल मार्किट स्थित आहूजा के फ्लैट में थे। मैं उनके दर्शन करने व आशीर्वाद लेने के लिये उनके पास पहुंचा। वहाँ बहुत से भक्तजन व शिष्य भी आये हुए थे। कुछ घण्टों तक का ऐसा आनन्दपूर्ण समय, जिसकी यहाँ व्याख्या करना भी सम्भव नहीं है, हमने अपूर्व खुशी…

100. जब गुरुजी ने आधी रात को मेरे पेट को छुआ और पेट दर्द तुरन्त गायब हो गया।

रात का समय था, मैं कुछ अन्य शिष्यों के साथ गुरूजी के कमरे में उनके पवित्र चरणों में बैठा था। गुरूजी रात के दो बजे तक हम पर आध्यात्मिक-ज्ञान और आशीर्वादों की वर्षा करते रहे। तदोपरांत उन्होंने खाने का आदेश दिया। जब सब लोग खाना खाकर चल दिये तो एफ. सी. शर्मा जी ने मुझे…

99. जब गुरुजी, अपने परम शिष्य के साथ स्कूटर चला कर अलीगढ़ गये।

गुरुजी के परमशिष्य श्री आर. पी. शर्मा को उनके घर से टेलीग्राम आया कि उनकी माताजी अंतिम सासें ले रही हैं और उन्हें तुरन्त अलीगढ़ बुलाया है। उसी समय वे टेलीग्राम लेकर गुड़गाँव पहुंचे और उन्होंने वह टेलीग्राम गुरुजी को दिखाया। गुरुजी ने टेलीग्राम लिया और उसे मरोड़कर शर्माजी के हाथ में देते हुए कहा—–…

98. गुरूजी के पास एक व्यक्ति आया डॉक्टरों के अनुसार उसकी जिन्दगी सिर्फ 15 दिन शेष बची थी।

दिमाग की बीमारी से ग्रस्त एक व्यक्ति, गुरूजी के पास आया। उसे डाक्टरों की तरफ से जवाब मिल चुका था और डॉक्टरों के अनुसार उसकी ज़िन्दगी, सिर्फ पन्द्रह दिन ही शेष बची थी। ऐसा सोचते हुए कि अब उसके लिए कोई उम्मीद नहीं बची एक आखिरी उम्मीद के साथ, किसी को लेकर वह गुरुजी के…

97. जब गुरुजी ने गुड़गाँव स्थान के लिए प्लॉट नम्बर 702, अलॉट कराया।

गुरूजी ने फैसला किया कि वे अपना घर बनायेंगे ताकि वहाँ सेवा कार्य में कोई विघ्न न डाल सके। जैसा कि बड़े वीरवार के दिन, शिवपुरी के किराये के मकान की छत पर इन्तज़ार करते हुए भक्तों को लेकर मकान मालिक ने ऐतराज़ किया था। गुरुजी ने एक रिहायशी प्लॉट के लिए प्रार्थना-पत्र (Application) दिया…

96. जब गुरुजी ने मुझे सिंक की डाई बनाने का डिज़ाईन दिया।

मैंने अपनी फैक्ट्री में, अपनी समझ के अनुसार, सिंक की एक डाई बनाई। जब उसको हाईड्रॉलिक प्रैस पर लगाकर चलाया तो वह असफल हो गई। मेरे मुख्य टेक्नीशियन ने बहुत कोशिश की, लेकिन सब बेकार…… आखिर मैंने टैक्नीकल मार्गदर्शन का सहारा लिया। इस समस्या से सम्बन्धित जितना मैं जानता था, उतना किया। लेकिन फिर भी…

95. जब गुरुजी का एक हाथ पेट और दूसरा कमर के नीचे रखते ही, पेट दर्द गायब हो गया।

एक बार मैं और मेरे अलावा श्री आर. पी. शर्मा, एफ. सी. शर्मा जी व नदौन के संतोष तथा और भी कई शिष्य, रात को गुड़गाँव स्थान पर रुके। करीब मध्य रात्रि तक हम सब गुरुजी के पवित्र चरणों में उनकी कृपा का आनन्द लेते रहे। अगले दिन सुबह-सुबह, एफ, सी, शर्माजी मेरे पास आकर…

94. भक्तों के माँगने पर गुरुजी ने अपने पर्स से पैसे निकाल कर उन्हें दिये।

गुरुजी स्थान के मुख्य द्वार पर खड़े थे और स्थान पर बैठे लोग, एक-एक करके गुरुजी को अपनी-अपनी समस्याएं बता रहे थे और गुरुजी उन्हें आशीर्वाद दे रहे थे। तभी वहाँ एक महिला आई और गुरुजी से कहने लगी कि उसने अभी-अभी शालों का नया कारोबार शुरु किया है उसके व्यापार में “बरकत” के लिए…

93. जब करवाचौथ के दिन गुरुजी ने, माताजी के लिए मिट्ठाईयाँ खरीदी।

गुरुजी, अपने ऑफिस में थे और सुरेन्द्र तनेजा भी उनके साथ था। गुरुजी के सहकर्मियों ने गुरुजी से तीन सौ रुपये कमेटी (Committee Contribution) में, उनके मासिक अंशदान के लिए मांगे। गुरूजी ने अपना पर्स खोला और उसमें से सौ-सौ के दो नोट निकाले और बाकी के सौ रुपये के लिए, दस और बीस के…