153. प्रेम और भक्ति की चरम सीमाओं का एक उदहारण

गुरुजी ने कहा, “बेटा, मैंने ये भी तो देखना है ना कि मेरे गुरु के गले में हार मुझसे कम ना पड़ें। …वाह, क्या रिश्ता है गुरूजी का अपने गुरु के साथ, प्रेम और मौहब्बत की इन्तहा– जवाब नहीं। वो शिवरात्रि का दिन था। सुबह की शुरुआत से लेकर रात्रि के 12 बजे तक लोगों…

152. जब गुरुजी ने एफ. सी. शर्मा जी को बाहर सड़क पर गुरु दर्शन के लिए लाईन में खड़े भक्तजनों की परिक्रमा करने के लिए कहा।

गुड़गाँव के सैक्टर 7, के स्थान के बाहर सड़क पर गुरुजी के दर्शन के लिए, अनगिनत लोग लाइन में खड़े थे। स्थान के पीछे सड़क और फुटपाथ को अलग रखने के लिए शामियाने लगाये गये थे ताकि उसमें भक्तजन लाईन में अपने ‘सुपर लार्ड’ गुरुजी की एक झलक पाने के लिए इन्तज़ार कर सकें। गुरूजी…

151. जब मुम्बई के दिनेश ने 1989 में अपने सीनियर स्टॉफ की शिकायत, गुरूजी से की।

मुम्बई के रहने वाले भक्तजन गुड़गाँव आकर, गुरुजी का आशीर्वाद लेने की ‘महाशिवरात्रि’ और ‘गुरु पूर्णिमा’ का बेसब्री से प्रतीक्षा करते थे। दिनेश भंडारे भी, ‘सुपर लार्ड’ का इन्तजार करने वालों में ऐसा ही एक भक्त है जो कभी इस अवसर को अपने हाथ से निकलने नहीं देना चाहता था। ऐसे ही एक अवसर पर…

150. मेरे एक मित्र की बहन नाजी, जो लगातार सिरदर्द व नींद न आने की बीमारी से ग्रसित थी।

मेरे बचपन के दोस्त को पता चला कि गुड़गाँव वाले महान गुरूजी ने मुझे अपना शिष्य बनाया है। वह मेरी पत्नी ‘गुलशन’ के भी बहुत करीब था, उसने अपनी परेशानी का कारण बताते हुए कहा कि मेरी छोटी बहन नाजी, जो पिछले छ: महीने से लगातार होने वाले सिरदर्द से बहुत परेशान है और रात…

149. एक संसारिक रुप में गुरुजी, “मर्यादा पुरुषोत्तम”

अस्सी के दशक के मध्य की बात है जब गुड़गाँव के सैक्टर-7 पर गुरुजी के दर्शन के लिये असंख्य लोगों की भीड़ चरम सीमा तक पहुंच गयी थी। रोजाना सुबह और शाम को स्थान के हॉल में तथा बाहर सड़क पर अनगिनत भक्तजन दर्शन हेतु एकत्रित होते थे। गुरुजी के लिये अपने ऑफिस जाना भी…

148. जब बड़े वीरवार के दिन मध्यान्तर के दौरान, रवि त्रेहन के लिए गाना गाने के बाद, मैं बोल भी नहीं सका।

अस्सी के दशक की शुरुआत की बात है। गुड़गाँव स्थान पर असंख्य लोग थे और सम्पूर्ण वातावरण में सिर्फ एक ही आवाज सुनाई दे रही थी और वह थी ‘गुरुजी’। कारों के शीशों पर स्टिकर लगे थे– एक ही सत्य— ‘गुरुजी’ सम्पूर्ण वातावरण एक ही शब्द से गूंज रहा था ‘गुरुजी’ । स्थान के क्या…

147. जब शिष्यों ने लंदन में खरीदारी की और गुरुजी ने पाउण्ड्स में उसका भुगतान किया।

Guruji was in London along with some of His Shishyas & Devotees like R. P. Sharmaji, Sardar Bakshi, Sabharwal and a few more. Some doctor living in Black Pool had invited Guruji with a great eagerness and devotion. So Guruji stayed in his house for a couple of days. The doctor requested Guruji to allow…

146. जब गुरूजी ओ. पी. आहूजा से बोले कि वे इस व्यक्ति का इन्तजार पाँच साल से कर रहे थे।

ओ. पी. आहूजा, आयकर विभाग में एक अधिकारी के पद पर कार्य करता था। वह गुरुजी के पास आया और बोला, “गुरुजी, मेरे विभाग में एक ऑफिसर है जिसका नाम आई. डी. शर्मा है। वह मुझे बहुत परेशान करता है। मैं चाहता हूँ कि वह मेरे नियन्त्रण में आ जाये ताकि ऑफिस का माहौल ठीक…

145. जब एक रात में गुरुजी ने ‘वीरजी’ की भांजी के चेहरे का मुहासा दूर कर दिया।

गुरुजी गुड़गाँव में थे और अचानक एक गम्भीर समस्या मुम्बई में गुरुशिष्य ‘वीरजी’ के परिवार में आ गयी। ‘गुरुशिष्य वीरजी’ की भाँजी ने आत्महत्या करने की धमकी दे डाली थी। वीरजी ने गुरुजी से प्रार्थना की कि जल्दी आईए और उसके परिवार की रक्षा कीजिए…. || गुरुजी, तुरन्त वहाँ पहुंचे और लड़की को अपने कमरे…

144. जब सेना के जनरल जगदीश अपने बच्चों के लिये कानूनी संरक्षण का अधिकार माँगा।

एक बार पंजाबी बाग में सेवा करते समय एक खूबसूरत नौजवान मेरे पास आया और मुझसे अकेले में बात करने की प्रार्थना की। उसे अपने साथ लेकर मैं ड्राईंग रुम में चला गया और बात करने के लिये कहा। उसने मुझे अपने आपको सेना का सेनानायक (Captain) बताया और मुझे दो बच्चों की फोटो दिखाते…