उस समय के कुछ दुर्लभ क्षण जब गुरुदेव ने मानव रूप को सुशोभित किया था। व्यक्तिगत घटनाओं को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

– (श्री राजपॉल सेखरी द्वारा लिखित – गुरुदेव के प्रमुख शिष्यों में से एक)

लेखक की कलम से

अविश्वस्नीय झलकियाँ – भाग-1, आकांक्षी गुरुभक्तों के लिए, आध्यात्म और गुरुभक्ति का एक सम्पूर्ण भोजन है। गुरूजी की असीम कृपा और समय-समय पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन से, गुरू ज्ञान के इच्छुक भक्तों के लिए, यह पुस्तक लिखी तथा वितरित की गई। लेकिन यह काफी नहीं थी शायद…। पुस्तक भाग-1 लिखने के बाद, मुझे ऐसी कई अन्य…

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52. जब कार में बिना पेट्रोल के वे लोग दिल्ली वापिस पहुँच गये।

कुछ लोग, जिनमें श्री आर. पी. शर्मा, श्री मारवाह भी थे, कार से गुरुजी के दर्शन करने के लिए शिमला आये थे, आशीर्वाद देने के बाद गुरुजी ने उन्हें दिल्ली वापिस जाने का आदेश दिया। उन्होंने वहाँ एक रात रुकने के लिए प्रार्थना की, लेकिन गुरुजी नहीं मानें। कार का मालिक ‘मारवाह’, गुरुजी से बोला,…

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53. जब बेलीराम तक्खी की बेटी की शादी 16 तारीख को हो गई।

बेलीराम तक्खी, गुरुजी के एक शिष्य थे। वे अपनी बड़ी लड़की की शादी के लिए बहुत परेशान थे तथा अब उन्होंने अपना धैर्य भी खो दिया था। उनकी लड़की अपने चाचा, सीताराम जी के पास आयी और उनसे बोली, “उसके बाऊजी रोज़ाना उसे बुरा-भला कहते हैं और उसकी शादी में देरी होने के लिए भी…

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54. जब एक महिला जो जोड़ो के दर्द से परेशान थी उसे उसके चार बेटे कंधों पर उठाकर, गुरुजी के पास लाये।

एक बार गुड़गाँव स्थान पर एक महिला को उसके चार बेटे अपने कंधों पर उठा कर लाये। वह बहुत बीमार थी। अगर उसको एक भी झटका लग जाता तो वह अपने बेटों को गालियाँ देने लगती। जब गुरुजी ने उसे आशीर्वाद दिया तो उसका पेशाब निकल गया, जिसका रंग चूने के पानी जैसा सफेद था।…

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55. जब गुरुजी ने बिगड़े हुए इंजन वाली, जोंगा जीप चलाई।

सुरेन्द्र तनेजा, गुरुजी के मुख्य शिष्यों में से एक हैं जो कर्मयोगी है और अपने स्टोन क्रशर उघोग में कार्यरत हैं जब कभी उनके स्टोन क्रशर में कोई बाधा आती तो वह स्वयं बाज़ार जाकर अपनी ज़रूरत के हिसाब से मशीन के पुर्जे तक भी लेकर आते। वह गुरुजी से बहुत अधिक प्यार करते हैं।…

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56. गुरुजी, मेरी पत्नी गुलशन के लिये वास्तव में त्रिकालदर्शी भगवान थे

मेरी पत्नी गुलशन, चाँदनी चौक बाज़ार घर के लिये कुछ खरीदारी करने गई। खरीदारी करते समय उसने वहाँ कुछ लुंगियाँ देखीं और उसमें से दो लुंगियाँ गुरुजी के लिये खरीद ली और वहाँ से सीधी गुड़गाँव चली गई। गुड़गाँव पहुंचकर जब गुलशन गुरुजी के कमरे में गईं, तो उस समय गुरुजी अपने कमरे में विश्राम…

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57. जब अमेरिका की एक सिंक फैक्ट्री वालों ने मुझे अपनी फैक्ट्री देखने की इजाजत नहीं दी।

एक बार मुझे व्यापार प्रदर्शनी (Trade Exhibition) में भाग लेने के लिए, शिकागो (अमेरिका) जाना पड़ा। मैंने सोचा कि कितना अच्छा हो यदि गुरूजी भी अमेरिका चलें और मेरी व्यवसायिक यात्रा, एक आध्यात्मिक यात्रा बन जाये…/ मेरी प्रार्थना पर गुरुजी मान गये और उनके आदेशानुसार मैंने हवाई जहाज़ के दो टिकट बुक करा लिये। कार्यक्रम…

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58. जब गुरूजी अपने शिष्यों के साथ हरिद्वार गये और थोड़ी सी चपातियों से वहाँ उपस्थित सभी लोगों को रात्रि का भोजन कराया।

एक बार गुरुजी, अपने शिष्यों के साथ हरिद्वार गये और उनके साथ उनके अन्य शिष्यों के अलावा, जालन्धर वाले मामाजी और नदौन के संतोष भी थे। एक रात वहाँ पर उपस्थित, पाँच लोगों के लिए ही चपातियाँ बनाई गई और राशन समाप्त हो गया। काफी रात हो गई थी, अतः उन्होंने सोचा कि अब और…

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59. जब कैशियर ने, गुरूजी के टूअर बिल के भुगतान करने से, मना कर दिया।

शुरु-शुरु के दिनों में लोग इन्हें, गुरुजी की तरह नहीं जानते थे। वे भारत सरकार की मिनिस्ट्री ऑफ एग्रीकल्चर में एक भू-वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत थे। गुरुजी अपने दफ़्तर जाते थे तथा अक्सर उन्हें हिमाचल प्रदेश, अपने ऑफिश्यिल टूअर्स पर, भूमि सर्वेक्षण के लिये, जाना होता था। उनके सहयोगी दल (Team) में ड्राइवर के…

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60. जब गुरुजी ने पंडित रामकुमार की भाँजी, कृष्णा को ठीक किया।

कृष्णा नामक नवयुवती, पंडित रामकुमार की भांजी को बार-बार दौरे पड़ते थे। दौरों के दौरान वह अक्रामक (Violent Behaviour) हो जाती थी। उसका परिवार उसके इस व्यवहार से बहुत परेशान था। उन्होंने कुछ लोगों से इस समस्या के समाधान की बात की तो किसी ने पंडित रामकुमार को उसे गुड़गाँव वाले गुरुजी के पास ले…

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61. जब गायत्री श्रीवास्तव ने गुरुजी के दर्शन करने की जिद्द की।

श्रीवास्तव जी, गुरूजी के शिष्य हैं और ‘लखनऊ’ में सेवा करते हैं। निजी जीवन में उनका प्रकाशन का कारोबार है और वह वहाँ से ‘उत्थान की दिशा’ नामक एक आध्यात्मिक पत्रिका भी निकालते हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य गुड़गाँव तथा अन्य गुरूस्थानों के प्रति जानकारी देना है। गुरुशिष्य श्रीवास्तव जी की पत्नी गायत्री श्रीवास्तव, एक धार्मिक…

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62. जब समुद्र ने, गुरूजी के चरण छूकर उनको प्रणाम किया।

बहुत से बच्चे, जिनमें इन्द्रा, बिन्दु, परवानु की इला गुप्ता, रेनु, बब्बा, छुटकी, पप्पू, इन्दु, रूबी, राहुल तथा और भी बहुत से बच्चों को अपने साथ लेकर गुरुजी मद्रास गये। सभी लोग, मौज-मस्ती के लिए समुद्र के किनारे (Beach) पर गये। सभी बच्चों ने समुद्र में नहाना शुरु कर दिया। तभी इन्द्रा के दिमाग में…

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63. जब गुरुजी ने रात को अपने स्कूटर का इंजन फुटपाथ पर खोला।

गुरुजी के पास, एक स्कूटर था। जिसे वे अक्सर अपने ऑफिस जाने के लिए प्रयोग करते थे। एक बार गुरुजी वही स्कूटर चला रहे थे और उनके पीछे उनके शिष्य एस. के. जैन साहब बैठे थे। अचानक स्कूटर खराब हो गया और गुरुजी ने उसे फुटपाथ पर ही खड़ा कर दिया। गुरूजी गुस्से की मुद्रा…

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64. जब मैंने और गुरूजी ने एक साथ अमेरिका जाने का प्रोग्राम बनाया।

गुरुजी के आशीर्वाद से जब मैंने, उनके साथ व्यापारिक विदेश-यात्रा (Business Trip) के लिये अमेरिका जाने का प्रोग्राम बनाया, तो गुरूजी ने अपनी स्वीकृति दे दी। इस बात से मैं बहुत प्रसन्न था। लेकिन गुरूजी किसी कारणवश लोगों में व्यस्त थे। अतः उन्होंने मुझे आदेश दिया कि मैं एअरपोर्ट पहुंचकर उनका इन्तज़ार करूं और वो…

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65. जब गुरुजी एक ही समय में चार जगह उपस्थित थे।

मैं यहाँ आपकी जानकारी के लिये कुछ लिख रहा हूँ, जो एक अलग तरह के ज्ञान पर आधारित है। अतः इस पर गम्भीरता पूर्वक विचार करें। इसे समझने के लिये ज़रूरी है कि अपने विचारों की तरंगों को रोकें। थोड़ा रुकें और उपयुक्त समय का इन्तज़ार करें। सच्चाई साबित करने के लिये किसी प्रमाण की…

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66. जब दूबे जी की बिल्डिंग गुरूजी के आशीर्वाद से खाली हो गई।

उत्तर प्रदेश के रहने वाले दूबे जी को, राजस्थान में स्थित अपनी जायदाद की कुछ समस्या थी। जो उसने वहाँ एक बैंक को किराये पर दे रखी थी। दूबे जी चाहते थे कि वह जगह खाली हो जाये परन्तु इसके लिए बैंक अधिकारी तैयार नहीं थे। संयोग वश, दूबे जी गुरुजी के शिष्य डा. शंकर-नारायण…

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67. जब गुरुजी अपना शरीर छोड़ गये और दुबारा उसमें वापिस लौटे।

गुरूजी का जन्म स्थान, पंजाब के होशियारपुर जिले के हरियाना गाँव में है। गुरुजी अपने कुछ शिष्य, जिनमें सीताराम जी, सनेत के सुरेश जी, आर. पी. शर्मा जी तथा मैं, राजा (जैसा कि गुरजी मुझे बुलाते थे) दिन की सेवा समाप्त करने के उपरान्त हमें एक छोटे से कमरे जिसमें बिस्तर आदि रखे जाते थे,…

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68. जब चन्दरभान की पत्नी को _एक पुत्र का आशीर्वाद दिया।

एफ. सी. शर्मा जी, गुरुजी के प्रारम्भिक शिष्यों में से एक हैं और आज भी उन्हीं के साथ जुड़े हुए हैं। उनकी धर्मपत्नी भी धार्मिक विचारों वाली हैं। वे अपना अधिकतर समय अपने घर में ही सेवा के लिये बिताते हैं। सभी बड़े दिन, जैसे गुरु पूर्णिमा, महाशिवरात्रि, गणेश चतुर्थी और बड़े वीरवार पर गुड़गाँव…

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69. जब मैंने गुरुजी का चेहरा दुगने बड़े आकार में देखा।

महा-शिवरात्रि का शुभ अवसर था और सभी शिष्य गुड़गाँव स्थान पर थे। हमेशा की तरह, असंख्य लोग देश-विदेश से इस अवसर पर गुड़गाँव आये हुए थे तथा स्थान के सभी कमरे लोगों से भरे हुए थे। बाहर मुख्य सड़क के फुटपाथ पर लोगों की लम्बी-लम्बी कतारें लगी हुई थी परन्तु वहाँ पूर्णतयाः शान्त वातावरण था।…

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70. जब गुरुजी ने मेरी सिंगापुर की __ व्यवसायिक विदेश-यात्रा (Tour) रद्द कर दी।

नई दिल्ली के मायापुरी इलाके में मेरी एक स्टेनलेस स्टील के सिंक बनाने की फैक्ट्री है। यह उस समय की बात है, जब हम सिंक के लिये, टब (Tub) तथा ड्रेनेज बोर्ड (Drainage Board), अलग-अलग स्टील की दो शीटों से बनाते थे तथा बाद में उन्हें जोड़ते थे। इस तरह के सिंक को ड्रेनेज बोर्ड-सिंक…

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71. जब महाराज-किशन को गुरूजी ने उनके स्नान करने तक उनका इन्तजार करने का आदेश दिया।

महाराज-किशन गुरुजी के प्रिय शिष्यों में से एक हैं। गुरुजी अक्सर उन्हें “रामाकृष्णा” के नाम से ही बुलाते थे। महाराज-किशन, गुरुजी के पास उनके कमरे में थे कि अचानक गुरूजी उठे और बोले— “बेटा, मैं नहाने जा रहा हूँ। तब तक तुम यहाँ मेरा इन्तजार करो।” महाराज-किशन ने किसी से सुन रखा था कि जब…

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72. गुरुजी के दाहिनी हथेली में जब एक दीप्तिमान ठोस ‘चक्र’ पहली बार देखा।

गुरु पूर्णिमा के दिन चल रहे थे, एक दिन देर शाम की बात है स्थान लोगों की भीड़ से खचाखच भरा हुआ था। लोगों की संख्या सैंकड़ों में नहीं, हज़ारों में थी। गुरूजी ने मुझे आदेश दिया कि मैं उनके पीछे आऊं और वे मुझे स्थान की पीछे फ्रिज़ वाले कमरे में ले गये। गुरूजी…

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73. मेरी पत्नी की शिकायत पर __ जब गुरुजी ने मेरे माथे पर स्ट्रोक्स (Strokes) लगाये।

एक बार मैं अपनी पत्नी तथा बेटियों के साथ रात के समय गुड़गाँव गया। वहाँ पहुँच कर हमने गुरुजी के पवित्र चरणों में प्रणाम किया। अचानक मेरी पत्नी ने गुरुजी से मेरी शिकायत की, “गुरुजी, अपने बेटे को तो देखिये……!! रास्ते में इन्होंने, सड़क पर तीन व्यक्तियों को करीब-करीब मार ही दिया होता…||” गुरुजी ने…

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74. जब मेरी फैक्ट्री का जनरल मैनेजर, बड़े वीरवार के दिन गुरुजी के पास गया।

मेरी फैक्ट्री का जनरल मैनेजर मि. अरोड़ा, एक कृत्रिम मिज़ाज ऑफिसर था जो सिर्फ अपने काम से मतलब रखता था। एक बार हम बैठे हुए साधारण बातचीत कर रहे थे कि वह बोला, “सर, अक्सर मैं ये देखता हूँ कि आपके पास लोग आते हैं आपके चरण छूते हैं आप भी उन्हें आशीर्वाद देते हैं…

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75. जब मानसिक रुप से बीमार राज अरोड़ा जो प्रेत-गसित था, हिंसात्मक हो गया।

गुरूजी ने मुझे, पंजाबी बाग स्थित मेरे निवास स्थान पर आध्यात्मिक शक्तियों द्वारा सेवा करने के लिये आशीर्वाद दिया है। मैं छुट्टी के दिन स्थान पर आये लोगों की शारीरिक और मानसिक बीमारियों को गुरूजी द्वारा दी गई आध्यात्मिक शक्तियों का प्रयोग करके दूर करता हूँ। इसको सेवा कहते हैं, यही मेरी भक्ति और साधना…

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76. गुरुजी ने कहा, “बेटा, मैं तुम्हें कभी भी, कहीं भी जब चाहूँ देख सकता हूँ।”

उस दिन क्या परम-आनन्द-पूर्ण दिन था, गुरूजी अपने कमरे में प्रसन्नचित मुद्रा में बैठे हम सबका मनोरंजन कर रहे थे। इस तरह का माहौल हम सब के लिए कभी-कभी ही बन पाता था। हम आठ-नौ शिष्य गुरुजी के पास बैठे बातें कर रहे थे, हंस रहे थे तथा आपस में सवाल-जवाब भी कर रहे थे।…

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77. जब गुरुजी ने, अपने शिष्य को, चार महीने के बाद, परांठा खाने के लिये दिया।

रेनुकाजी में, कई हफ्तों की लगातार सेवा के बाद गुरुजी ने अपने कुछ शिष्यों को सेवा के अन्तिम चरण के लिये बुलाया और सभी अपनी इस पवित्र यात्रा के लिये गुरुजी के पास रेनुकाजी चल दिये। हममें से दो शिष्य, सुबह ही एक अलग कार में चले गये। उन दोनों का आपस में बहुत नज़दीकी…

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78. जब एक 18 वर्षीय लड़का पागल हो गया और उसकी आँखों की पुतलियाँ ऊपर की तरफ़ हो गयी।

हमेशा की तरह मैंने पंजाबी बाग स्थान पर बैठकर सेवा शुरु की। लोग अपनी-अपनी बारी से एक के बाद एक मेरे पास आते और उनके जाने के बाद फिर किसी दूसरे व्यक्ति को मेरे पास भेजा जाता। मैं महागुरू का शिष्य हूँ और उन्हीं ने मुझे अपना शिष्य बनाया है तथा आदेश देकर मुझे सेवा…

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79. गुरुजी की दासता अच्छी है।

एक बार गुरुजी के बहुत से शिष्यों की मीटिंग चल रही थी। यह एक बहुत मजेदार मीटिंग थी। हर शिष्य गुरुजी के अविश्वस्नीय कार्यों से सम्बन्धित अपना-अपना व्यक्तिगत अनुभव बता रहा था। हर किसी का अनुभव दूसरे से अच्छा था। हर घटना अति उत्तम थी तथा दिल को छू लेने वाली थी। सबसे सुन्दर बात…

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80. गुरुजी अधिकतर लम्बी सेवा के बीच हम शिष्यों को मध्यान्तर (Interval) देते थे।

मध्यान्तर (Interval) का समय, यह समय हम सब के लिये एक प्यार तथा मस्ती का समय होता था जिसमें हम साधारण बातचीत करते थे। इसमें गुरुजी, सभी शिष्यों को उनके प्यार के उपनाम (Nick Names) से भी पुकारते थे। चुटकुले और हंसी-मज़ाक ऐसे होता था, मानो कि हम सभी उनके दोस्त हों। लेकिन हमेशा सबसे…

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81. गुरुजी की अर्धागिनी माता जी, अन्नपूर्णा हैं…||

गुरूजी ने, मेरी दो बेटियों के लिये गुड़गाँव स्थान पर दो लड़कों का चुनाव किया। गुरुजी ने मुझे बच्चों के शगुन करने के लिये एक छोटा सा समारोह करने की अनुमति दी और उसका इन्तज़ाम करने के लिए पंजाबी बाग भेजा।। दोनों परिवार, जिनमें से एक मुम्बई और दूसरा हैदराबाद से था, उन्होंने अपने-अपने रिश्तेदारों…

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82. जब एक जर्मन फोटोग्राफर, गुरूजी की फोटो खींचना चाहता था।

अस्सी के दशक की महाशिवरात्रि समारोह की बात है, सम्पूर्ण भारत के अलावा विश्व के अन्य देशों से भी लोग इसमें शामिल होने के लिए गुड़गाँव में एकत्र हुए थे। शिवरात्रि से दो दिन पूर्व, एक नवयुवक जो जर्मनी से आया था और गुरुजी की फोटो खींचना चाहता था। गुरुजी बोले— “बेटा, आज नहीं…. दो…

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83. जब गुरूजी के पास एक प्रेत-गसित जवान लड़का आया।

गुड़गाँव स्थान पर, गुड़गांव के एक उद्योगपति का जवान बेटा, जो प्रेत-ग्रसित था, अपने पिता के साथ आया और आते ही अव्यवहारिक बर्ताव करना शुरु कर दिया। वह ऐसे बर्ताव कर रहा था जैसे वहाँ स्वयं मौजूद न हो बल्कि उसके अन्दर से कोई दूसरा व्यक्ति बात कर रहा हो। वह अपनी गद्रन को झटके…

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84. गुरुजी ने, अली असगर को मिरगी के रोग से मुक्त किया।

जम्मू के मुश्ताक मौहम्मद जाफरी के साथ मेरे व्यापारिक सम्बन्ध थे। एक बार वे अपनी पत्नी और बेटे के साथ दिल्ली आये तो मेरी उनसे फोन पर बात हुई। उन्होंने मुझे बताया कि उनके बेटे अली असगर को निमोनिया, तेज़ बुखार और उसके शरीर पर छालों के निशान पड़ गये हैं। वह बहुत परेशान लग…

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85. जब गुरूजी ने एक महिला के बिगड़े हुए खराब चेहरे को कुछ दिनों में ही ठीक कर दिया।

एक व्यक्ति, अपनी पत्नी को जिसके चेहरे की हालत बहुत खराब व बिगड़ी हुई थी, गुरूजी के पास लेकर आया और उन्हें बताते हुए प्रार्थना करने लगा कि गुरुजी यह मेरी पत्नी है। यह पहले बहुत खूबसूरत थी। लेकिन अचानक इसका चेहरा पहले सफ़ेद होने लगा और फिर धीरे-धीरे पिछले कुछ सालों में उसकी हालत…

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86. जब गुरुजी ने 1984 के दंगों से एक रात पहले बड़े वीरवार की सेवा स्थगित कर दी।

प्रत्येक बड़े वीरवार के दिन, गुरूजी से आशीर्वाद लेने वाले लोगों की भीड़ लगातार बढ़ती ही चली जा रही थी। इस तरह दिन-ब-दिन लोगों की बढ़ती हुई संख्या को देखते हुए, गुरुजी ने बुद्धवार की रात्रि से ही ‘बड़े वीरवार’ की सेवा करनी शुरु कर दी थी। गुरूजी ने यह निर्णय इसलिए भी लिया था…

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87. जब फोटो के भरे बैग में से गुरूजी ने उसकी बेटी की फोटो निकाली।

गुरुपूर्णिमा का समय था। मुम्बई से ‘वीरजी’ के नेतृत्व में मुम्बई स्थान के लोगों के एक ग्रुप में दिनेश भंडारे जो आध्यात्मिक ज्ञान का जिज्ञासु था, अपने दिमाग में सिर्फ एक ही विचार लेकर आया था कि वह जान सके कि गुरुजी कौन हैं और गुड़गाँव स्थान पर ऐसा क्या होता है कि मुम्बई के…

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88. जब मैंने अपने आप को भूख से व्याकुल महसूस किया।

प्रत्येक बड़े-वीरवार से पहले आने वाले बुद्धवार रात को माता जी, सभी शिष्यों और सेवादारों को स्वयं खाना खिलाती थी। मैं भी रात के समय गुड़गाँव पहुंचा और माताजी को प्रणाम किया तो माताजी ने मुझे भी एक दाल-चावल की फुल प्लेट पकड़ा दी। मैंने कहा, “मातारानी जी, जब मैं पंजाबी बाग से चला था…

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89. जब संतलाल जी ने गुरुजी से गुड़गाँव वाले फार्म में आलू की पैदावार के बारे में बात की।

गुरुजी अपने कमरे में बैठे थे, मैं भी अन्य शिष्यों के साथ उनके पास बैठा था। संतलाल जी, गुरुजी के प्रिय शिष्यों में से एक हैं। जब गुरुजी प्रसन्न-मुद्रा (Light Mood) में होते तो हम भी गुरुजी की इस मुद्रा (Free Mood) का फायदा उठाते हुए, उनसे खुलकर बात कर लेते थे। शिवरात्रि नज़दीक थी…

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90. जब गुरुजी श्रीनगर, कश्मीर गये।

गुरुजी, श्रीनगर में थे और उनकी जीप मे अचानक कोई खराबी आ गई। अतः हम, लाल चौक पर स्थित एक मोटर पार्टस की दुकान पर गये। हमने दुकानदार से अपनी जरुरत के पुर्जे देने के लिये कहा। उसने अपने किसी नौकर से वह पुर्जे निकालकर लाने को बोला और स्वयं किसी दूसरे ग्राहक के साथ…

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91. जब सुरेन्द्र तनेजा को अपने पुत्र का मुंडन कराने की इजाजत देने से गुरूजी ने मना कर दिया।

सुरेन्द्र तनेजा के बड़े भाई ने अपने तथा सुरेन्द्र के बेटे का मुन्डन समारोह करने का प्रोग्राम बनाया और उसके लिए दिन भी तय कर दिया। सुरेन्द्र इस समारोह के लिए गुरुजी से इजाजत लेने के उद्देश्य से, उनके पास गया। लेकिन गुरुजी ने मुंडन कराने के लिए मना कर दिया। सुरेन्द्र का बड़ा भाई…

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92. गुरुजी की टाँग में बाल-तोड़ था जिसका मुझे ज्ञान नहीं था और संयोगवश, मैं उसी टाँग को दबा रहा था।

दरियागंज में मेरा एक शोरूम था। जहाँ बर्तन तथा अन्य सामान का व्यापार होता था। कई बार गुरुजी की विशेष कृपा होती और वे हमें आशीर्वाद देने के लिए, वहीं आ जाते थे। ऐसे ही एक दिन, दोपहर का समय था और गुरुजी मुझे अनुगृहीत करने के लिए आ गये। गुरूजी के आने की खबर…

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93. जब करवाचौथ के दिन गुरुजी ने, माताजी के लिए मिट्ठाईयाँ खरीदी।

गुरुजी, अपने ऑफिस में थे और सुरेन्द्र तनेजा भी उनके साथ था। गुरुजी के सहकर्मियों ने गुरुजी से तीन सौ रुपये कमेटी (Committee Contribution) में, उनके मासिक अंशदान के लिए मांगे। गुरूजी ने अपना पर्स खोला और उसमें से सौ-सौ के दो नोट निकाले और बाकी के सौ रुपये के लिए, दस और बीस के…

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94. भक्तों के माँगने पर गुरुजी ने अपने पर्स से पैसे निकाल कर उन्हें दिये।

गुरुजी स्थान के मुख्य द्वार पर खड़े थे और स्थान पर बैठे लोग, एक-एक करके गुरुजी को अपनी-अपनी समस्याएं बता रहे थे और गुरुजी उन्हें आशीर्वाद दे रहे थे। तभी वहाँ एक महिला आई और गुरुजी से कहने लगी कि उसने अभी-अभी शालों का नया कारोबार शुरु किया है उसके व्यापार में “बरकत” के लिए…

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95. जब गुरुजी का एक हाथ पेट और दूसरा कमर के नीचे रखते ही, पेट दर्द गायब हो गया।

एक बार मैं और मेरे अलावा श्री आर. पी. शर्मा, एफ. सी. शर्मा जी व नदौन के संतोष तथा और भी कई शिष्य, रात को गुड़गाँव स्थान पर रुके। करीब मध्य रात्रि तक हम सब गुरुजी के पवित्र चरणों में उनकी कृपा का आनन्द लेते रहे। अगले दिन सुबह-सुबह, एफ, सी, शर्माजी मेरे पास आकर…

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96. जब गुरुजी ने मुझे सिंक की डाई बनाने का डिज़ाईन दिया।

मैंने अपनी फैक्ट्री में, अपनी समझ के अनुसार, सिंक की एक डाई बनाई। जब उसको हाईड्रॉलिक प्रैस पर लगाकर चलाया तो वह असफल हो गई। मेरे मुख्य टेक्नीशियन ने बहुत कोशिश की, लेकिन सब बेकार…… आखिर मैंने टैक्नीकल मार्गदर्शन का सहारा लिया। इस समस्या से सम्बन्धित जितना मैं जानता था, उतना किया। लेकिन फिर भी…

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97. जब गुरुजी ने गुड़गाँव स्थान के लिए प्लॉट नम्बर 702, अलॉट कराया।

गुरूजी ने फैसला किया कि वे अपना घर बनायेंगे ताकि वहाँ सेवा कार्य में कोई विघ्न न डाल सके। जैसा कि बड़े वीरवार के दिन, शिवपुरी के किराये के मकान की छत पर इन्तज़ार करते हुए भक्तों को लेकर मकान मालिक ने ऐतराज़ किया था। गुरुजी ने एक रिहायशी प्लॉट के लिए प्रार्थना-पत्र (Application) दिया…

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98. गुरूजी के पास एक व्यक्ति आया डॉक्टरों के अनुसार उसकी जिन्दगी सिर्फ 15 दिन शेष बची थी।

दिमाग की बीमारी से ग्रस्त एक व्यक्ति, गुरूजी के पास आया। उसे डाक्टरों की तरफ से जवाब मिल चुका था और डॉक्टरों के अनुसार उसकी ज़िन्दगी, सिर्फ पन्द्रह दिन ही शेष बची थी। ऐसा सोचते हुए कि अब उसके लिए कोई उम्मीद नहीं बची एक आखिरी उम्मीद के साथ, किसी को लेकर वह गुरुजी के…

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99. जब गुरुजी, अपने परम शिष्य के साथ स्कूटर चला कर अलीगढ़ गये।

गुरुजी के परमशिष्य श्री आर. पी. शर्मा को उनके घर से टेलीग्राम आया कि उनकी माताजी अंतिम सासें ले रही हैं और उन्हें तुरन्त अलीगढ़ बुलाया है। उसी समय वे टेलीग्राम लेकर गुड़गाँव पहुंचे और उन्होंने वह टेलीग्राम गुरुजी को दिखाया। गुरुजी ने टेलीग्राम लिया और उसे मरोड़कर शर्माजी के हाथ में देते हुए कहा—–…

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100. जब गुरुजी ने आधी रात को मेरे पेट को छुआ और पेट दर्द तुरन्त गायब हो गया।

रात का समय था, मैं कुछ अन्य शिष्यों के साथ गुरूजी के कमरे में उनके पवित्र चरणों में बैठा था। गुरूजी रात के दो बजे तक हम पर आध्यात्मिक-ज्ञान और आशीर्वादों की वर्षा करते रहे। तदोपरांत उन्होंने खाने का आदेश दिया। जब सब लोग खाना खाकर चल दिये तो एफ. सी. शर्मा जी ने मुझे…

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101. गुरुजी समय के अधीन नहीं, अपितु समय उनके अधीन है।

अस्सी के दशक की बात है। गुरुजी गोल मार्किट स्थित आहूजा के फ्लैट में थे। मैं उनके दर्शन करने व आशीर्वाद लेने के लिये उनके पास पहुंचा। वहाँ बहुत से भक्तजन व शिष्य भी आये हुए थे। कुछ घण्टों तक का ऐसा आनन्दपूर्ण समय, जिसकी यहाँ व्याख्या करना भी सम्भव नहीं है, हमने अपूर्व खुशी…

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102. गुरुजी के पास लोग विभिन्न कारणों से…. और विभिन्न इच्छाएं लेकर आते थे।

ब्रह्मज्ञान के लिये वैसे तो, गुरुजी के द्वार, हर किसी के लिये खुले थे लेकिन लोग इनके पास विभिन्न प्रकार की इच्छाएँ और विभिन्न कारणवश आते थे, जिनमें से—– कुछ लोग, संसारिक ज़रुरतों को पूरा करने की प्रार्थना करते थे। कुछ, उनसे अपनी बीमारियाँ दूर कर, एक स्वस्थ शरीर के लिये प्रार्थना करते। कुछ लोग,…

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